Breaking News

धर्मांतरण प्रक्रिया में पारदर्शिता लाएगा नया विधेयक: सामाजिक संगठनों का समर्थन

post

धर्मांतरण प्रक्रिया में पारदर्शिता लाएगा नया विधेयक: सामाजिक संगठनों का समर्थन

रायपुर | छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा पारित 'धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026' को लेकर प्रदेश के विभिन्न सामाजिक संगठनों और समाज प्रमुखों ने अपनी सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। राजधानी रायपुर में आयोजित अलग-अलग प्रेस वार्ताओं में प्रतिनिधियों ने एक सुर में कहा कि यह विधेयक सामाजिक संतुलन, सांस्कृतिक संरक्षण और वास्तविक धार्मिक स्वतंत्रता सुनिश्चित करने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।

समाज प्रमुखों का मानना है कि यह कानून विशेष रूप से समाज के कमजोर और वंचित वर्गों के हितों की रक्षा करेगा और धर्मांतरण की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाएगा।

प्रमुख सामाजिक संगठनों की प्रतिक्रियाएं:

1. जनजातीय गौरव समाज: "संस्कृति की रक्षा के लिए आवश्यक" समाज के अध्यक्ष प्रेम सिंह ठाकुर और वरिष्ठ नेता विकास मरकाम ने कहा कि ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों में पिछले कुछ समय से धर्मांतरण के कारण सामाजिक समरसता बिगड़ी थी। उन्होंने कहा, "यह विधेयक सुनिश्चित करता है कि धर्म परिवर्तन केवल स्वेच्छा से हो, न कि किसी बल या प्रलोभन से। यह कानून व्यक्तिगत आजादी और सामाजिक स्थिरता के बीच संतुलन है।"

2. सतनामी महासभा: "पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी" महासभा के अध्यक्ष राजमहंत डॉ. बसंत अंचल ने विधेयक का स्वागत करते हुए कहा कि धर्मांतरण का विषय केवल व्यक्तिगत नहीं होता, बल्कि पूरे सामाजिक ताने-बाने को प्रभावित करता है। पूर्व सूचना और विधिक प्रक्रिया जैसे प्रावधानों से समाज में अनावश्यक विवाद कम होंगे और आपसी विश्वास मजबूत होगा।

3. मनवा कुर्मी एवं देवांगन समाज: "कमजोर वर्गों को मिलेगी सुरक्षा" मनवा कुर्मी समाज के अध्यक्ष खोडसेराम कश्यप और देवांगन समाज के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष महेश देवांगन ने इसे समय की मांग बताया। उन्होंने कहा कि जब धर्मांतरण दबाव में होता है, तो असंतुलन पैदा होता है। यह कानून 'विविधता में एकता' की भावना को सशक्त करेगा।

4. सर्व साहू समाज एवं उत्कल गांड़ा महिला महामंच: "ऐतिहासिक निर्णय" साहू समाज के नेता विनय साहू ने इसे दूरदर्शी पहल बताया, वहीं उत्कल गांड़ा महिला महामंच की प्रदेश अध्यक्ष सावित्री जगत ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह कानून गरीबों और महिलाओं की संस्कृति की रक्षा करेगा।

विधेयक के समर्थन में मुख्य बिंदु:

प्रक्रिया में पारदर्शिता: धर्म परिवर्तन के लिए पूर्व सूचना और कानूनी औपचारिकताएं अनिवार्य होंगी।

प्रलोभन पर रोक: बलपूर्वक या लालच देकर कराए जाने वाले धर्मांतरण पर प्रभावी अंकुश लगेगा।

सांस्कृतिक संरक्षण: छत्तीसगढ़ की मूल परंपराओं और जनजातीय संस्कृति को सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी।

सामाजिक समरसता: विवादों में कमी आएगी और विभिन्न समुदायों के बीच भाईचारा बढ़ेगा।

निष्कर्ष: प्रेस वार्ता के अंत में सभी प्रतिनिधियों ने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे इस कानून की मूल भावना को समझें और आपसी संवाद व सम्मान के साथ छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को और अधिक मजबूत बनाने में अपना योगदान दें।

You might also like!