काठमांडू, 05 मई । नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने राजनीतिक दलों से जुड़े छात्र और कर्मचारी संगठनों को खत्म करने के सरकार के फैसले का बचाव करते हुए इसपर सफाई दी है।
उनका तर्क है कि शैक्षणिक संस्थानों और कर्मचारी तंत्र में वर्षों से जड़ जमा चुकी दलगतकरण (पार्टीकरण) को समाप्त कर व्यवस्था सुधार के लिए सरकार ने इन संगठनों को खत्म करने का निर्णय लिया है।
मंगलवार सुबह सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी बात रखते हुए प्रधानमंत्री शाह ने कहा कि छात्र और कर्मचारी संगठन पेशागत हित से अधिक राजनीतिक दलों के ‘स्लीपर सेल’ बन गए थे, इसलिए यह नया निर्णय दोनों- कर्मचारियों और छात्रों के हित में लिया गया है।
उन्होंने लिखा, “योग्यता से अधिक पहुँच और क्षमता से अधिक झोला और झंडे का महत्व बढ़ने से पूरी व्यवस्था पर जनता का विश्वास कमजोर हुआ है। इसलिए स्पष्ट निर्णय आवश्यक था—शैक्षणिक संस्थानों में दल का झंडा और कर्मचारी तंत्र में दल का झोला निषेध।”
उनका कहना है कि यह नई व्यवस्था किसी के अधिकारों को नहीं छीनती बल्कि पेशागत स्वतंत्रता को और मजबूत बनाएगी। अब नियुक्ति, स्थानांतरण और पदोन्नति का आधार राजनीतिक निकटता नहीं बल्कि नियम, योग्यता और दक्षता होगी- यह भी उन्होंने स्पष्ट किया।
उन्होंने कहा, “यह कदम किसी विशेष पार्टी के खिलाफ लड़ाई नहीं है बल्कि देश को दलगत कब्जे से निकाल कर संस्थागत मार्ग पर लाने का प्रयास है। बदलाव भाषण से नहीं, निर्णय से आता है। हम जो भी करते हैं, आम जनता के हित में करते हैं।”
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छात्र संगठन और ट्रेड यूनियन खत्म करने को लेकर नेपाल के पीएम ने दी सफाई












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