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बलरामपुर : मनरेगा की डबरी से बदली किसान की तकदीर, रुका पलायन

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बलरामपुर : मनरेगा की डबरी से बदली किसान की तकदीर, रुका पलायन

बलरामपुर, 02 जून । मनरेगा के तहत किए गए जल संरक्षण कार्य ग्राम पंचायत लोधी के किसानों के लिए वरदान साबित हो रहे हैं। डबरी निर्माण से जहां सिंचित क्षेत्र में वृद्धि हुई है, वहीं रोजगार के अवसर बढ़ने से ग्रामीणों का पलायन भी रुका है।

विकासखंड शंकरगढ़ के ग्राम लोधी निवासी किसान लवंगसाय की खेती पहले पूरी तरह बारिश पर निर्भर थी। गर्मी के दिनों में कुएं और हैंडपंप सूख जाते थे, जिससे सिंचाई की गंभीर समस्या पैदा हो जाती थी। रबी फसल लेना मुश्किल था और कई परिवारों को रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों की ओर पलायन करना पड़ता था।मनरेगा के तहत लवंगसाय के खेत में 1.88 लाख रुपये की लागत से व्यक्तिगत डबरी का निर्माण कराया गया। मार्च 2026 में यह कार्य पूरा हुआ। निर्माण कार्य के दौरान ग्रामीणों को 658 मानव दिवस का रोजगार भी मिला।

डबरी बनने के बाद वर्षा जल का संग्रहण होने लगा, जिससे भूजल स्तर में सुधार आया और आसपास के कुओं में पानी की उपलब्धता बढ़ी। पहले जहां किसान सीमित फसलें उगाते थे, वहीं अब गेहूं, चना और विभिन्न प्रकार की सब्जियों की खेती भी कर रहे हैं। सिंचित क्षेत्र दाे एकड़ से बढ़कर पांच एकड़ तक पहुंच गया है।जल संरक्षण के इस कार्य का असर ग्रामीणों की आजीविका पर भी दिखाई दे रहा है। मजदूरी के लिए बाहर जाने वाले लगभग 25 परिवारों का पलायन रुक गया है और अब वे गांव में ही खेती एवं कृषि आधारित कार्यों से रोजगार प्राप्त कर रहे हैं।

किसान लवंगसाय का कहना है कि डबरी निर्माण के बाद खेती की संभावनाएं बढ़ी हैं। सिंचाई सुविधा मिलने से फसल उत्पादन में सुधार हुआ है और अब वे मछली पालन शुरू कर अतिरिक्त आय अर्जित करने की तैयारी कर रहे हैं।ग्रामीणों का मानना है कि मनरेगा के तहत किए जा रहे जल संरक्षण कार्य केवल पानी की उपलब्धता बढ़ाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने, रोजगार सृजन और गांवों को आत्मनिर्भर बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

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