भारत और ब्रिटेन के बीच लागू फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) को लेकर उद्योग जगत में सकारात्मक उम्मीदें जताई जा रही हैं। एसोचैम की एक नई स्टडी के अनुसार, इस समझौते के प्रभाव से वर्ष 2030 तक दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार करीब दोगुना होकर 115 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। इसके साथ ही 7 से 10 लाख नए रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना भी जताई गई है। एसोचैम ग्लोबल रिसर्च एंड स्ट्रैटेजी सेंटर की स्टडी में बताया गया है कि भारत-ब्रिटेन एफटीए से दोनों देशों के कारोबारियों को बाजार तक बेहतर पहुंच मिलेगी। इससे व्यापारिक गतिविधियों में तेजी आने के साथ-साथ निर्यात को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
स्टडी के मुताबिक, 15 जुलाई 2026 से लागू हुए इस समझौते का सबसे अधिक लाभ उन क्षेत्रों को मिल सकता है, जहां बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार मिलता है। इनमें टेक्सटाइल, लेदर, इंजीनियरिंग गुड्स, फार्मास्यूटिकल्स और ऑटोमोटिव जैसे उद्योग प्रमुख हैं।
एसोचैम ने कहा कि इन श्रम-प्रधान क्षेत्रों को ब्रिटेन के बड़े बाजार तक बेहतर पहुंच मिलने से भारतीय कंपनियों के लिए नए अवसर खुलेंगे। इससे उत्पादन बढ़ सकता है और निर्यात में भी वृद्धि होने की संभावना है। रोजगार के नए अवसर पैदा होने से देश की युवा आबादी को भी फायदा मिलने की उम्मीद है।
निर्यात और निवेश को मिलेगा बढ़ावा
स्टडी में कहा गया है कि एफटीए केवल व्यापार बढ़ाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे दोनों देशों के बीच निवेश संबंधों को भी मजबूती मिल सकती है। बेहतर व्यापारिक माहौल बनने से भारतीय उद्योगों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने में मदद मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत-ब्रिटेन व्यापार समझौता भारतीय उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बना सकता है। खासकर छोटे और मध्यम उद्योगों के लिए यह समझौता नए अवसर लेकर आ सकता है।
एसोचैम की रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि भारत की युवा आबादी और कुशल श्रम शक्ति इस समझौते का बड़ा लाभ उठा सकती है। यदि उद्योगों में उत्पादन और निर्यात बढ़ता है तो रोजगार के नए रास्ते खुलेंगे।
श्रम आधारित उद्योगों को मिलेगा फायदा
टेक्सटाइल और लेदर जैसे उद्योग लंबे समय से भारत में बड़े रोजगार देने वाले क्षेत्रों में शामिल रहे हैं। ब्रिटेन के बाजार में इन उत्पादों की मांग बढ़ने से भारतीय निर्माताओं को फायदा मिल सकता है।
इसी तरह इंजीनियरिंग गुड्स, ऑटोमोबाइल और फार्मास्युटिकल सेक्टर में भी व्यापार विस्तार की संभावनाएं जताई गई हैं। कंपनियों को नए ग्राहकों तक पहुंच बनाने और अपने कारोबार का विस्तार करने का अवसर मिल सकता है।
आर्थिक संबंधों को मिलेगी नई दिशा
भारत और ब्रिटेन के बीच एफटीए को दोनों देशों के आर्थिक संबंधों में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। उद्योग संगठनों का कहना है कि यह समझौता व्यापार बढ़ाने के साथ-साथ रोजगार, निवेश और औद्योगिक विकास को गति दे सकता है। एसोचैम की स्टडी के अनुसार, यदि समझौते का प्रभावी तरीके से इस्तेमाल किया जाता है तो आने वाले वर्षों में भारत-ब्रिटेन आर्थिक साझेदारी और मजबूत हो सकती है। इससे भारतीय उद्योगों को वैश्विक बाजार में अपनी स्थिति मजबूत करने और देश में रोजगार के नए अवसर पैदा करने में मदद मिल सकती है।
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