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OTT प्लेटफॉर्म्स के लिए सख्त नियमों की सिफारिश आपत्तिजनक कंटेंट पर कसेगा शिकंजा


व्यापार 08 August 2026
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OTT प्लेटफॉर्म्स के लिए सख्त नियमों की सिफारिश आपत्तिजनक कंटेंट पर कसेगा शिकंजा

भारत में OTT प्लेटफॉर्म्स पर उपलब्ध कंटेंट को लेकर लंबे समय से बहस चलती रही है। अब आपत्तिजनक और अनुचित कंटेंट पर नियंत्रण को लेकर संसदीय स्तर पर भी चिंता सामने आई है। एक संसदीय समिति ने सरकार से OTT प्लेटफॉर्म्स पर प्रसारित होने वाली सामग्री की निगरानी और नियमन को मजबूत करने की सिफारिश की है। समिति का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के तेजी से विस्तार के साथ ऐसे कंटेंट की उपलब्धता भी बढ़ी है, जो कुछ दर्शकों, विशेषकर बच्चों और किशोरों के लिए अनुपयुक्त हो सकता है। ऐसे में मौजूदा व्यवस्था को और प्रभावी बनाने की जरूरत महसूस की जा रही है।

पारंपरिक टेलीविजन और फिल्मों की तुलना में OTT प्लेटफॉर्म्स पर कंटेंट की विविधता और उपलब्धता काफी अधिक है। दर्शक अपनी पसंद के अनुसार किसी भी समय सामग्री देख सकते हैं। इसी वजह से समिति ने कंटेंट की निगरानी, उम्र के अनुसार वर्गीकरण और मौजूदा नियमों के प्रभावी पालन पर ध्यान देने की जरूरत बताई है। बच्चों की सुरक्षा बनी अहम मुद्दा OTT कंटेंट को लेकर सबसे बड़ी चिंताओं में से एक बच्चों और किशोरों तक अनुचित सामग्री की आसान पहुंच है।


उम्र-आधारित रेटिंग और पैरेंटल कंट्रोल जैसी सुविधाएं उपलब्ध होने के बावजूद हर परिवार में उनका प्रभावी इस्तेमाल नहीं हो पाता। ऐसे में समिति की सिफारिशों का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य बच्चों को आयु-अनुपयुक्त सामग्री से बचाने की व्यवस्था को मजबूत करना हो सकता है। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और नियमन में संतुलन OTT कंटेंट को नियंत्रित करने की कोशिश के साथ एक अहम सवाल अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का भी है। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर रचनात्मक स्वतंत्रता और सामाजिक जिम्मेदारी के बीच संतुलन बनाना आसान नहीं है।

यदि सरकार संसदीय समिति की सिफारिशों के आधार पर नियमों को और सख्त करती है, तो OTT कंपनियों को अपने कंटेंट की समीक्षा और वर्गीकरण की प्रक्रिया मजबूत करनी पड़ सकती है। इसका असर कंटेंट निर्माताओं पर भी पड़ सकता है। निर्माताओं को शूटिंग और रिलीज से पहले यह सुनिश्चित करना होगा कि उनकी सामग्री लागू नियमों और आयु-आधारित मानकों के अनुरूप हो। आगे क्या? संसदीय समिति की सिफारिश के बाद अब निगाहें सरकार के अगले कदम पर रहेंगी। यदि नए नियम या दिशानिर्देश आते हैं, तो उनका उद्देश्य OTT प्लेटफॉर्म्स पर उपलब्ध सामग्री को पूरी तरह रोकना नहीं, बल्कि दर्शकों की सुरक्षा और जिम्मेदार डिजिटल मनोरंजन के बीच संतुलन बनाना होना चाहिए। डिजिटल मनोरंजन का विस्तार जारी रहने के बीच भारत के लिए चुनौती यही है कि वह एक ऐसा नियामक ढांचा तैयार करे जो बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करे, शिकायतों का समाधान करे और साथ ही रचनात्मक स्वतंत्रता का सम्मान भी बनाए रखे।


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