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7 दिन बाद तिहाड़ से बाहर आए सौरभ और रांका, निर्मला सीतारमण के पति का दीपके को समर्थन


देश 22 October 2026
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7 दिन बाद तिहाड़ से बाहर आए सौरभ और रांका, निर्मला सीतारमण के पति का दीपके को समर्थन

तिहाड़ जेल में सात दिन बिताने के बाद सौरभ दास और आशुतोष रांका की रिहाई की खबर के साथ राजनीतिक और कानूनी हलकों में हलचल तेज हो गई है। इस मामले को लेकर अब आगे की जांच और संबंधित लोगों से पूछताछ पर नजरें टिकी हुई हैं। जेल से बाहर आने के बाद मामले में क्या नया मोड़ आएगा और जांच एजेंसियां आगे क्या कदम उठाएंगी, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट हो सकेगा। दूसरी ओर, निर्मला सीतारमण के पति की ओर से दीपके को समर्थन दिए जाने की खबर भी चर्चा में है। इस घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक गलियारों में अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ सकती हैं।

रिपोर्टों के मुताबिक, सौरव दास और आशुतोष रांका को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन से जुड़े मामले में हिरासत में लिया गया था। दोनों पर आरोप था कि उन्होंने जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाए जाने के बावजूद वहां प्रवेश कर विरोध जताया और पहले दिए गए शांति बनाए रखने के बांड का उल्लंघन किया। 14 अक्टूबर को उन्हें पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था, जिसे बाद में दो दिन के लिए बढ़ा दिया गया। 21 अक्टूबर को विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने लिखित माफीनामा, शपथ पत्र और शांति बनाए रखने के आश्वासन के बाद उनकी रिहाई का आदेश दिया। दोनों को 50 हजार रुपये के व्यक्तिगत और जमानत बांड की शर्तों पर रिहा किया गया। दिल्ली हाईकोर्ट ने उनकी हिरासत के मामले में हस्तक्षेप नहीं किया था, जिसके बाद उन्होंने अपनी याचिका वापस ले ली

इसी बीच, केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के पति और अर्थशास्त्री पराकला प्रभाकर की ओर से अभिजीत दीपके के समर्थन में सामने आने की खबर भी महत्वपूर्ण है। रिपोर्टों के अनुसार, 23 अक्टूबर को मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के विरोध में आयोजित होने वाले प्रदर्शन में पराकला प्रभाकर के साथ दीपके, नेहा बोरा, प्रशांत भूषण और प्रकाश राज सहित कई लोगों के शामिल होने की संभावना है। इस प्रदर्शन के जरिए एसआईआर प्रक्रिया और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर विरोध दर्ज कराने की तैयारी है

सौरव दास और आशुतोष रांका की रिहाई तथा दीपके को मिल रहे समर्थन से एसआईआर के मुद्दे पर विरोध की गतिविधियां फिर चर्चा में आ गई हैं। अब सबकी नजर 23 अक्टूबर को होने वाले प्रदर्शन और उसमें जुटने वाले लोगों पर रहेगी। साथ ही, यह भी देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रदर्शनकारी अपनी मांगों को किस तरह सामने रखते हैं और प्रशासन कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए क्या कदम उठाता है

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