18 जून । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को पद्म श्री सम्मानित बौद्ध विद्वान रॉबर्ट ए. एफ. थर्मन के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि रॉबर्ट थर्मन बौद्ध धर्म के प्रतिष्ठित विद्वान, प्रख्यात शिक्षक और भारत के आजीवन मित्र थे, जिन्होंने अपने कार्यों के माध्यम से बौद्ध विचारों को वैश्विक स्तर पर लोकप्रिय बनाया और विभिन्न संस्कृतियों के बीच संवाद एवं समझ के मजबूत सेतु स्थापित किए।
पीएम मोदी ने साझा की संवेदनाएं
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, “बौद्ध धर्म के जाने-माने विद्वान, प्रतिष्ठित शिक्षक और भारत के आजीवन मित्र रॉबर्ट ए. एफ. थर्मन के निधन से बेहद दुख हुआ। अपने कार्यों के माध्यम से उन्होंने बौद्ध विचारों को दुनिया भर में लोकप्रिय बनाया और विभिन्न संस्कृतियों के बीच समझ तथा संवाद के मजबूत सेतु स्थापित किए। मुझे कुछ वर्ष पहले न्यूयॉर्क में हुई हमारी मुलाकात अच्छी तरह याद है, जहां हमारी सार्थक चर्चा हुई थी। इस दुख की घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनके परिवार, मित्रों और प्रशंसकों के साथ हैं।”
84 वर्ष की उम्र में हुआ निधन
तिब्बती बौद्ध परंपरा के प्रमुख अंतरराष्ट्रीय विद्वानों में शामिल प्रोफेसर रॉबर्ट थर्मन का 84 वर्ष की आयु में निधन हो गया। तिब्बत हाउस यूएस ने बुधवार को इसकी जानकारी देते हुए बताया कि उनका निधन 16 जून की सुबह वुडस्टॉक, न्यूयॉर्क में हुआ।
दलाई लामा के करीबी मित्र और पद्म श्री सम्मानित विद्वान
रॉबर्ट थर्मन तिब्बती आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा के लंबे समय से करीबी मित्र थे। भारत सरकार ने उन्हें बौद्ध अध्ययन और भारत-तिब्बत सांस्कृतिक संबंधों में योगदान के लिए पद्म श्री से सम्मानित किया था। वह तिब्बती बौद्ध धर्म के अध्ययन, लेखन, अनुवाद और व्याख्या के क्षेत्र में विश्व स्तर पर प्रतिष्ठित नाम थे।
पीएम मोदी से 2023 में हुई थी मुलाकात
पीएम नरेंद्र मोदी 21 जून, 2023 को न्यूयॉर्क दौरे के दौरान प्रोफेसर थर्मन से मिले थे। इस मुलाकात में दोनों ने इस बात पर विचार साझा किए थे कि बौद्ध मूल्य वैश्विक चुनौतियों के समाधान में किस प्रकार मार्गदर्शक भूमिका निभा सकते हैं। साथ ही भारत की बौद्ध विरासत और उससे जुड़े संरक्षण प्रयासों पर भी चर्चा हुई थी।
भारतीय आध्यात्मिक विरासत के प्रचार में महत्वपूर्ण योगदान
न्यूयॉर्क स्थित भारतीय महावाणिज्य दूतावास ने भी उनके निधन पर शोक व्यक्त किया। दूतावास ने कहा कि प्रोफेसर थर्मन का इंडो-तिब्बती बौद्ध अध्ययन के प्रति आजीवन समर्पण भगवान बुद्ध के कालजयी संदेश को दुनिया भर की पीढ़ियों तक पहुंचाने में सहायक रहा। उनके कार्यों ने भारत की समृद्ध आध्यात्मिक विरासत के प्रति वैश्विक समझ को भी मजबूत किया।
बौद्ध अध्ययन के क्षेत्र में था विशिष्ट स्थान
सेंट्रल तिब्बतन एडमिनिस्ट्रेशन (सीटीए) के अनुसार, प्रोफेसर थर्मन ने तिब्बती बौद्ध धर्म पर अनेक पुस्तकों का लेखन, संपादन और अनुवाद किया। वह कोलंबिया यूनिवर्सिटी के धर्म विभाग में इंडो-तिब्बती बौद्ध अध्ययन के जे त्सोंग खापा प्रोफेसर रहे। इसके अलावा वह तिब्बत हाउस यूएस और अमेरिकन इंस्टीट्यूट ऑफ बुद्धिस्ट स्टडीज के अध्यक्ष भी थे। उन्होंने तिब्बती कांग्यूर से विमलकीर्ति सूत्र का अंग्रेजी में अनुवाद किया था।
वैश्विक स्तर पर मिली थी पहचान
प्रोफेसर थर्मन तिब्बती बौद्ध धार्मिक और दार्शनिक साहित्य के अनुवाद एवं व्याख्या के लिए व्यापक रूप से सम्मानित थे। उन्हें 1997 में अमेरिका के 25 सबसे प्रभावशाली व्यक्तियों में शामिल किया गया था। वहीं, 2006 में न्यूयॉर्क मैगजीन ने उन्हें धर्म के क्षेत्र के प्रभावशाली व्यक्तियों में स्थान दिया था। वह अभिनेत्री उमा थर्मन के पिता भी थे।







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