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61 साल पुराना क्लासिक गाना, कश्मीर में शिकारे पर नंदा, चांदनी में नहाई रात और लता मंगेशकर की आवाज- आज भी प्लेलिस्ट में टॉप पर ये सॉन्ग


मनोरंजन 24 July 2026
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61 साल पुराना क्लासिक गाना, कश्मीर में शिकारे पर नंदा, चांदनी में नहाई रात और लता मंगेशकर की आवाज- आज भी प्लेलिस्ट में टॉप पर ये सॉन्ग

हिंदी सिनेमा के पुराने गानों की बात ही कुछ और होती है. उन गानों में सिर्फ संगीत ही नहीं बल्कि उनके बोल एक अलग ही एहसास देते हैं, गानों को फिल्माने के लिए खूबसूरत लोकेशन और बेहतरीन एक्टिंग का एक ऐसा कॉम्बो देखने को मिलता है, जो उन्हें सदाबहार गीत बनाता है. हम बात कर रहे हैं 1960 के दशक के रोमांटिक सान्ग 'ये समा, समा है ये प्यार का'. 1965 में रिलीज हुआ 'जब जब फूल खिले' का ये गाना आज भी रोमांटिक गानों की प्लेलिस्ट में टॉप पर रहता है. इस गाने में डल झील में तैरते शिकारे में, सफेद गाउन पहने नंदा की अदाएं और शशि कपूर का भोलापन और लता मंगेशकर की दिल को छू लेने वाली आवाज ने इस गाने में एक अलग ही नशा घोल दिया है. जो छह दशक के बाद भी बरकरार है

लता मंगेशकर की आवाज ने बनाया अमर

'ये समा, समा है ये प्यार का' उन गानों में शामिल है जिसको सुनते ही एक अलग सुकून महसूस होता है. गानों के बोल और संगीत के साथ लता जी की आवाज इस गाने की सबसे बड़ी ताकत है. उन्होंने इस रोमांटिक गाने को इतनी खूबसूरती से गाया है कि आज भी हर उम्र के संगीत प्रेमियों को पसंद बना हुआ है. इस गाने को सुनते ही लगता है कि हम कश्मीर की वादियों में शिकारे पर बैठे, ठंडी हवाओं के बीच और पहाड़ों से घिरे हुए हैं. 

सफेद गाउन में नंदा का आइकॉनिक लुक

इन गाने में एक्ट्रेस नंदा का सफेद गाउन में लुक भी बेहद खास था. सैटिन के सफेद रंग के गाउन पहने डल झील के शिकारे पर नजर आती हैं. उनका लुक बेहद ही सिंपल लेकिन एलिगेंट था जो उस समय पर एक फैशन स्टेटमेंट बन गया था. 

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डल झील की खूबसूरती 

इस गाने की शूटिंग जम्मू-कश्मीर के फेमस डल झील में हुई थी. वहां की सर्द हवाएं, शांत पानी, शिकारा और चांदनी रात का नजारा इस गाने के संगीत और बोल के साथ बिल्कुल परफेक्ट मैच हो रहा है. यही वजह है कि इसे हिंदी सिनेमा के सबसे खूबसूरत रोमांटिक गानों में गिना जाता है.

आनंद बख्शी के बोल और कल्याणजी-आनंदजी का संगीत

इस सदाबहार गाने के बोल फेमस गीतकार आनंद बख्शी ने लिखे थे. वहीं इसका संगीत क्लयाणजी और आनंदजी की जोड़ी ने मिलकर तैयार किया था. बेहतरीन बोल, मदहोश करने वाला संगीत और लता जी की सुरीली और दिलकश आवाज ने मिलकर ऐसा जादू चलाया कि ये गाना उस समय की कसौटी पर आज भी खरा उतरता है.

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शशि कपूर और नंदा की जोड़ी को किया पसंद

फिल्म 'जब जब फूल खिले' में नंदा और शशि कपूर की जोड़ी को भी लोगों ने खूब पसंद किया था. इस गाने में शशि कपूर के बोल नहीं थे, लेकिन उनके भोलेपन और मासूमियत और अपनी नजरों और मुस्कान से  ही उस गाने में प्यार का एहसास कराते हैं. उनकी यही सादगी इस गाने को और भी खास बना देती है.

सुपरहिट रही थी फिल्म

ये फिल्म 1965 में रिलीज हुई थी. जब जब फूल खिले का बजट लगभग 20 लाख रुपये बताई जाती है जबकि फिल्म ने तीन करोड़ रुपये का कलेक्श किया था. फिल्म का निर्देशन सूरज प्रकाश ने किया था

 

 

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