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संसद ने बैंकर्स बुक्स एविडेंस बिल पारित किया, जिसके तहत डिजिटल बैंकिंग रिकॉर्ड को कानूनी साक्ष्य के रूप में मान्यता दी गई।


देश 10 August 2026
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संसद ने बैंकर्स बुक्स एविडेंस बिल पारित किया, जिसके तहत डिजिटल बैंकिंग रिकॉर्ड को कानूनी साक्ष्य के रूप में मान्यता दी गई।

संसद ने बैंकर्स बुक्स एविडेंस बिल, 2026 पारित कर दिया है, जिसे राज्यसभा ने आज मंजूरी दे दी। लोकसभा पहले ही इस विधेयक को पारित कर चुकी है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस विधेयक को पेश किया था, जिसका उद्देश्य वर्तमान बैंकिंग प्रणाली की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए कानूनी ढांचे का आधुनिकीकरण करना है। विधेयक में बैंकर्स बुक्स से संबंधित साक्ष्यों के लिए कानून बनाने और इसे समकालीन डिजिटल बैंकिंग प्रथाओं के अनुरूप बनाने का प्रावधान है। विधेयक में यह भी प्रावधान है कि बैंकर्स बुक का इलेक्ट्रॉनिक या डिजिटल रिकॉर्ड साक्ष्य के रूप में स्वीकार्य, वैध और कानूनी रूप से लागू करने योग्य होगा।

विधेयक पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा कि यह विधेयक एक बहुत ही क्रांतिकारी कदम है, जिससे देश को तेजी से प्रगति करने में मदद मिलेगी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बैंकर्स बुक्स एविडेंस एक्ट 1891 में बनाया गया था, जब बैंकिंग प्रणाली पूरी तरह से कागजी थी। श्रीमती सीतारमण ने कहा कि आज भारत ने अपनी अर्थव्यवस्था के डिजिटलीकरण में उल्लेखनीय प्रगति की है। उन्होंने कहा कि बैंकिंग और वित्तीय लेनदेन अब काफी हद तक डिजिटल प्लेटफॉर्म द्वारा संचालित होते हैं, जो अक्सर मोबाइल फोन पर एक साधारण क्लिक से सुलभ होते हैं। मंत्री ने कहा कि ऐसे परिदृश्य में, देश के कानूनी ढांचे का इन प्रगति के साथ तालमेल बिठाने के लिए विकसित होना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि मौजूदा 1891 का अधिनियम कानूनी कार्यवाही में स्वीकार्य साक्ष्य के रूप में भौतिक बैंक रिकॉर्ड की प्रमाणित प्रतियों पर बहुत अधिक निर्भर करता है। श्री सीतारमण ने कहा कि यह विधेयक बैंकर्स के रिकॉर्ड के लिए एक प्रौद्योगिकी-तटस्थ कानूनी ढांचा स्थापित करता है, जो औपचारिक रूप से इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल बैंकिंग रिकॉर्ड को मान्यता देता है और कानूनी कार्यवाही में उनकी स्वीकार्यता सुनिश्चित करता है। यह प्रमाणीकरण प्रक्रिया को भी मानकीकृत करता है और मैनुअल, डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षरों के माध्यम से प्रमाणीकरण की अनुमति देता है।

इससे पहले, चर्चा में भाग लेते हुए भाजपा के अरुण सिंह ने कहा कि यह नया विधेयक ब्रिटिश शासन के दौरान 1891 में बने पुराने कानून में बदलाव लाने के लिए लाया गया है। श्री सिंह ने कहा कि यह विधेयक बैंकिंग प्रणाली को और मजबूत करेगा, जिसे भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बैंकिंग प्रणाली में क्रांतिकारी परिवर्तन देखने को मिल रहा है। श्री सिंह ने बताया कि विधेयक में यह प्रावधान है कि डिजिटल या कम्प्यूटरीकृत रूप में प्रस्तुत साक्ष्यों को भी साक्ष्य के रूप में स्वीकार किया जाएगा।

बीजेडी के मानस रंजन मंगराज ने विधेयक के उद्देश्यों का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि डेटा सुरक्षा और गोपनीयता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि बैंकिंग रिकॉर्ड में संवेदनशील व्यक्तिगत और वित्तीय जानकारी होती है, इसलिए सरकार को दुरुपयोग, अनधिकृत पहुंच और साइबर खतरों को रोकने के लिए मजबूत सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करने चाहिए। अन्य सदस्यों ने भी विधेयक पर अपने विचार रखे।

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