छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक एवं जनजातीय सांस्कृतिक विरासत को 15 अगस्त 2026 को राष्ट्रपति भवन में आयोजित होने वाले स्वतंत्रता दिवस स्वागत समारोह ‘एट होम’ में विशेष स्थान मिलेगा। भारत की स्वतंत्रता की 80वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित समारोह में छत्तीसगढ़, गोवा, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र की जीवंत लोक एवं पारंपरिक कला परंपराओं के माध्यम से संस्कृति, समुदाय और प्रकृति के बीच गहरे संबंध को रेखांकित किया जाएगा।
छत्तीसगढ़ शासन के अनुसार, समारोह में राज्य की ओर से गेंड़ी और गौर मड़िया नृत्य प्रमुख आकर्षण होंगे। हरेली पर्व से जुड़ा गेंड़ी नृत्य ऊंची बांस की गेंड़ियों पर कलाकारों के संतुलन, फुर्ती और कौशल को प्रदर्शित करता है। यह छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल में विशेष रूप से मुड़िया और गोंड जनजातीय समुदायों की पारंपरिक लोक संस्कृति से जुड़ा है और वर्षा ऋतु की शुरुआत में हरेली तिहार के अवसर पर किया जाता है।
वहीं, बस्तर के मड़िया समुदाय से जुड़ा गौर मड़िया नृत्य पारंपरिक वेशभूषा और विशिष्ट शिरोभूषण के माध्यम से जनजातीय जीवन, वीरता और प्रकृति के साथ समुदाय के गहरे संबंध को अभिव्यक्त करता है।
समारोह में छत्तीसगढ़, गोवा, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के करीब 35 कलाकार विभिन्न लोक नृत्यों और पारंपरिक संगीत प्रस्तुतियों में हिस्सा लेंगे। कार्यक्रम में लावणी, तुतारी, सोंगी मुखावटे, गेंड़ी, गौर मड़िया, भगोरिया, बैगा करमा, सामई और घोड़े मोडनी जैसी लोक प्रस्तुतियां शामिल होंगी।
पूरी संगीत प्रस्तुति को भारत की विविध लोक परंपराओं की सांस्कृतिक यात्रा के रूप में तैयार किया गया है। इसकी शुरुआत छत्तीसगढ़ और बस्तर की पारंपरिक अनुष्ठानिक परंपराओं पर आधारित मंगल धुन से होगी। इसके बाद महाराष्ट्र, गोवा और मध्य प्रदेश की संगीत परंपराओं को प्रस्तुत किया जाएगा। कार्यक्रम के अंतिम चरण में चारों राज्यों के कलाकार संयुक्त प्रस्तुति देंगे।
संगीत प्रस्तुति का संयोजन छत्तीसगढ़ के लोक गायक, संगीतकार, लेखक और रंगकर्मी राकेश कुमार तिवारी ने किया है। संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित तिवारी छत्तीसगढ़ी लोक संगीत के संरक्षण और संवर्धन के लिए जाने जाते हैं।
इस प्रस्तुति में छत्तीसगढ़ के बालोद और नारायणपुर जिले के कलाकार भी हिस्सा लेंगे। बालोद के कलाकार मोहरी, दफड़ा, दमाऊ, गुड़ुम और बांसुरी जैसे पारंपरिक वाद्ययंत्रों की प्रस्तुति देंगे। वहीं, नारायणपुर के कलाकार गुटा परई, नार परई, ढोल और कुंदिर जैसे वाद्ययंत्रों के जरिए बस्तर की पारंपरिक संगीत विरासत को राष्ट्रीय मंच पर सामने लाएंगे।
राष्ट्रपति भवन में होने वाली सांस्कृतिक प्रस्तुति में छत्तीसगढ़ की विरासत को केवल संगीत और नृत्य तक सीमित नहीं रखा गया है। राज्य की पारंपरिक शिल्प और वस्त्र परंपराओं को भी इसमें प्रमुखता दी जाएगी।
ढोकरा और बस्तर के पारंपरिक लौह शिल्प के जरिए राज्य की समृद्ध हस्तशिल्प परंपरा को प्रदर्शित किया जाएगा। वहीं, चारों राज्यों की विशिष्ट वस्त्र परंपराओं को भी साझा प्रस्तुति का हिस्सा बनाया गया है। इसमें छत्तीसगढ़ की पनिका बुनाई, महाराष्ट्र की करवत काठी साड़ी, गोवा की कुंभी साड़ी और मध्य प्रदेश की महेश्वरी बुनाई को प्रदर्शित किया जाएगा।
इस वर्ष की सांस्कृतिक प्रस्तुति का प्रमुख संदेश सांस्कृतिक विरासत और पर्यावरण संरक्षण के बीच संबंध पर केंद्रित है। छत्तीसगढ़ के संदर्भ में बस्तर की पारंपरिक जीवनशैली, शिल्प और पवित्र उपवनों के संरक्षण जैसी परंपराओं के माध्यम से समुदाय और प्रकृति के सह-अस्तित्व को रेखांकित किया जाएगा।
राष्ट्रपति भवन के स्वतंत्रता दिवस स्वागत समारोह में छत्तीसगढ़ की लोक एवं जनजातीय कला, बस्तर की संगीत परंपरा, पारंपरिक वाद्ययंत्र, हस्तशिल्प और पनिका बुनाई को राष्ट्रीय मंच मिलेगा। इस प्रस्तुति के जरिए छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विविधता, मौलिकता और प्रकृति से जुड़ी जीवनशैली को देश के सामने प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया जाएगा।















