सेमीकंडक्टर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधुनिक तकनीक की आधारशिला बन चुके हैं। स्मार्टफोन, वाहन, उपग्रहों से लेकर एआई प्रणालियों तक, सेमीकंडक्टर की भूमिका लगातार बढ़ रही है। वहीं, एआई के तेजी से विस्तार से उन्नत चिप्स, विशेष प्रोसेसर और उच्च क्षमता वाली कंप्यूटिंग की मांग बढ़ी है।
इस बढ़ते तालमेल को देखते हुए भारत चिप डिजाइन और निर्माण से लेकर उन्नत पैकेजिंग, कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और स्वदेशी एआई मॉडल तक अपनी क्षमताओं को मजबूत कर रहा है। सरकार की विभिन्न पहलों का उद्देश्य एक एकीकृत तकनीकी पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करना है, जो आत्मनिर्भरता, आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती और नवाचार को बढ़ावा दे।
भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर सेमीकंडक्टर और एआई के क्षेत्र में विकसित हो रही ये क्षमताएं वैश्विक तकनीकी नेतृत्व की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही हैं।
सेमीकंडक्टर में आत्मनिर्भरता की दिशा में बढ़ता भारत
भारत सेमीकंडक्टर की पूरी वैल्यू चेन में घरेलू क्षमताएं विकसित कर रहा है। इसमें चिप डिजाइन, फैब्रिकेशन, एडवांस्ड पैकेजिंग, उपकरण, सामग्री और कुशल प्रतिभा शामिल हैं।
सेमिकॉन 1.0 ने ₹76,000 करोड़ के परिव्यय के साथ भारत में सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम की नींव रखी। इसके तहत चिप डिजाइन, फैब्रिकेशन, पैकेजिंग, टेस्टिंग, उपकरण, सामग्री और कौशल विकास सहित पूरी वैल्यू चेन को समर्थन दिया गया।
अब सेमिकॉन 2.0 इस आधार को आगे बढ़ाते हुए वैश्विक सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम में भारत की भूमिका मजबूत करने पर केंद्रित है। जुलाई 2026 में मंजूर सेमिकॉन 2.0 के लिए ₹1,27,500 करोड़ का परिव्यय रखा गया है।
इसके छह प्रमुख स्तंभ हैं—चिप डिजाइन, सेमीकंडक्टर उपकरण और सामग्री, फैब्रिकेशन सुविधाएं, एडवांस्ड पैकेजिंग, अनुसंधान एवं विकास तथा प्रतिभा विकास।
सेमीकंडक्टर नीति से उत्पादन तक
भारत में छह राज्यों में 12 सेमीकंडक्टर परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है, जिनमें ₹1.64 लाख करोड़ से अधिक के निवेश की प्रतिबद्धता है।
इन परियोजनाओं में सिलिकॉन और कंपाउंड सेमीकंडक्टर फैब, डिस्प्ले फैब्रिकेशन तथा एडवांस्ड पैकेजिंग सुविधाएं शामिल हैं। इनमें से तीन सुविधाओं में व्यावसायिक उत्पादन शुरू हो चुका है, जो भारत के लिए नीति और योजनाओं से आगे बढ़कर वास्तविक सेमीकंडक्टर निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
इन सेमीकंडक्टर सुविधाओं से ऑटोमोबाइल, दूरसंचार, एयरोस्पेस, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स और कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों को जरूरी घटक उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
चिप डिजाइन में भी बढ़ रही घरेलू क्षमता
भविष्य की कार्यबल जरूरतों को देखते हुए सरकार सेमीकंडक्टर स्किलिंग पर भी जोर दे रही है।
चिप्स टू स्टार्टअप (C2S) कार्यक्रम के तहत 320 शैक्षणिक संस्थानों में इलेक्ट्रॉनिक डिजाइन ऑटोमेशन (EDA) टूल उपलब्ध कराए गए हैं और 68,000 से अधिक छात्रों को प्रशिक्षित किया गया है।
डिजाइन लिंक्ड इंसेंटिव (DLI) योजना के तहत 24 सेमीकंडक्टर डिजाइन परियोजनाओं को वित्तीय सहायता के लिए मंजूरी मिली है। इसके अलावा 105 स्टार्टअप और MSME को EDA टूल सहायता दी गई है।
अप्रैल 2026 तक 75 संस्थानों द्वारा 211 चिप्स का टेप-आउट किया गया है। इनमें से विभिन्न नोड्स पर 7 चिप्स सफलतापूर्वक तैयार किए जा चुके हैं, जिनमें 12 नैनोमीटर जैसे उन्नत नोड भी शामिल हैं।
एआई के लिए भारत का अपना कंप्यूटिंग इकोसिस्टम
सेमीकंडक्टर के साथ भारत एआई क्षमता को भी बड़े स्तर पर विकसित कर रहा है। लगभग ₹10,372 करोड़ के परिव्यय के साथ शुरू की गई इंडियाAI मिशन का उद्देश्य सुरक्षित, समावेशी और भारतीय जरूरतों के अनुरूप एआई क्षमताएं विकसित करना है।
जून 2026 तक इंडियाAI मिशन के तहत साझा कंप्यूट क्षमता बढ़कर 45,000 से अधिक GPU हो गई है।
अगस्त 2026 तक 237 परियोजनाओं ने सब्सिडी वाली एआई कंप्यूटिंग का इस्तेमाल किया है और उन्हें 93.18 लाख GPU घंटे उपलब्ध कराए गए हैं। इससे भारतीय शोधकर्ताओं, स्टार्टअप और नवप्रवर्तकों के लिए उच्च क्षमता वाली कंप्यूटिंग तक पहुंच आसान हुई है।
स्वदेशी एआई मॉडल विकसित करने पर जोर
भारत में स्थानीय भाषाओं और जरूरतों के अनुरूप एआई मॉडल विकसित करने की दिशा में भी काम चल रहा है।
कुल 506 आवेदनों में से सरकार ने 20 स्वदेशी फाउंडेशन मॉडल प्रस्तावों का चयन किया है। इनमें 12 लार्ज मल्टीमॉडल मॉडल और 8 स्मॉल लैंग्वेज मॉडल शामिल हैं।
वहीं, जुलाई 2026 तक AI Kosh पर 14,000 से अधिक डेटासेट और 331 एआई मॉडल उपलब्ध हैं। यह शोधकर्ताओं और डेवलपर्स को एआई समाधान विकसित करने के लिए जरूरी संसाधन उपलब्ध कराने में मदद करता है।
एआई का सरकारी सेवाओं में इस्तेमाल
इंडियाAI की पहलों के तहत अगस्त 2026 तक 62 एआई प्रोटोटाइप विकसित किए गए हैं और सार्वजनिक क्षेत्र की संस्थाओं में 20 एआई समाधान लागू किए जा चुके हैं।
इसके अलावा 11 राष्ट्रीय स्तर के हैकाथॉन और नवाचार चुनौतियों के जरिए नए एआई समाधानों को विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है।
देशभर में 58 एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस को मंजूरी दी गई है, जबकि 13 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में 22 केंद्रों को मंजूरी देकर उनका काम शुरू किया जा चुका है।
जिम्मेदार एआई पर भी ध्यान
तेजी से बढ़ते एआई उपयोग के साथ सुरक्षा और जिम्मेदारी पर भी जोर दिया जा रहा है। जुलाई 2026 तक इंडियाAI मिशन के सेफ एंड ट्रस्टेड एआई स्तंभ के तहत 13 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है।
इन परियोजनाओं में एआई में पक्षपात कम करना, मशीन अनलर्निंग, डीपफेक का पता लगाना, गोपनीयता सुरक्षित रखने वाली एआई, एआई की व्याख्यात्मकता और एआई जोखिम मूल्यांकन जैसे विषय शामिल हैं।
बढ़ रहा डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर
एआई के लिए जरूरी कंप्यूटिंग क्षमता को समर्थन देने के लिए भारत में डेटा सेंटर क्षमता भी तेजी से बढ़ी है।
देश की स्थापित डेटा सेंटर क्षमता 2020 के 375 मेगावाट से बढ़कर लगभग 1,575 मेगावाट हो गई है। मुंबई, नवी मुंबई, चेन्नई, हैदराबाद, बेंगलुरु, दिल्ली-एनसीआर और गुजरात जैसे क्षेत्रों में डेटा सेंटर मौजूद हैं।
आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल भी नए निवेश के लिए डेटा सेंटर केंद्र के रूप में उभर रहे हैं।
वैश्विक स्तर पर भारत की बढ़ती पहचान
Stanford Global AI Vibrancy Report 2025 में भारत को एआई प्रतिस्पर्धा और इकोसिस्टम की मजबूती के मामले में दुनिया में तीसरे स्थान पर रखा गया।
2025 में भारत GitHub पर एआई परियोजनाओं में योगदान देने वाला दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश रहा।
फरवरी 2026 में आयोजित India AI Impact Summit 2026 में 100 से अधिक देशों और 20 अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। इसके घोषणापत्र को 92 देशों और संगठनों ने अपनाया।
भारत ने इसी सम्मेलन के दौरान Pax Silica Coalition में भी प्रवेश किया, जिसका उद्देश्य अमेरिका और अन्य साझेदारों के साथ मिलकर वैश्विक सिलिकॉन आपूर्ति श्रृंखलाओं को अधिक मजबूत और लचीला बनाना है।
चिप्स और एआई से तकनीकी नेतृत्व की ओर
भारत का सेमीकंडक्टर कार्यक्रम अब केवल परियोजनाओं की मंजूरी और डिजाइन सहायता तक सीमित नहीं है। देश में व्यावसायिक उत्पादन शुरू हो चुका है और सेमिकॉन 2.0 के जरिए उपकरण, सामग्री, एडवांस्ड पैकेजिंग, अनुसंधान, स्वदेशी सेमीकंडक्टर आईपी और प्रतिभा विकास पर अधिक जोर दिया जा रहा है।
साथ ही, इंडियाAI मिशन साझा कंप्यूटिंग क्षमता, स्वदेशी एआई मॉडल और सरकारी, उद्योग, शिक्षा जगत तथा स्टार्टअप के लिए एआई अनुप्रयोगों को बढ़ावा दे रहा है।
सेमीकंडक्टर और एआई को साथ लेकर आगे बढ़ने की यह रणनीति भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता को मजबूत करने, नवाचार और उच्च-कौशल रोजगार के अवसर बढ़ाने तथा देश को वैश्विक प्रौद्योगिकी नेतृत्व की दिशा में आगे ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।















