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MEA सचिव श्रीप्रिया रंगनाथन ने ब्रिक्स सम्मेलन में भारत की अध्यक्षता की प्राथमिकताओं को किया रेखांकित


विदेश 17 August 2026
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MEA सचिव श्रीप्रिया रंगनाथन ने ब्रिक्स सम्मेलन में भारत की अध्यक्षता की प्राथमिकताओं को किया रेखांकित

विदेश मंत्रालय की सचिव (कॉन्सुलर, पासपोर्ट, वीज़ा एवं प्रवासी भारतीय मामले) श्रीप्रिया रंगनाथन ने रविवार को मिस्र की राजधानी काहिरा में आयोजित भारत-मिस्र ब्रिक्स पार्टनरशिप कॉन्फ्रेंस में भारत की ब्रिक्स 2026 अध्यक्षता की प्रमुख प्राथमिकताओं पर विशेष बल दिया।

भारतीय दूतावास, मिस्र ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी देते हुए बताया कि सचिव रंगनाथन ने डिप्लोमैटिक क्लब में हुए उद्घाटन सत्र को संबोधित किया। यह सम्मेलन भारतीय दूतावास ने इंडियन काउंसिल ऑफ वर्ल्ड अफेयर्स (ICWA) के सहयोग से आयोजित किया था। 

भारत-मिस्र की रणनीतिक साझेदारी

अपने संबोधन में सचिव ने स्पष्ट किया कि भारत-मिस्र रणनीतिक साझेदारी ब्रिक्स मंच पर आपसी सहयोग बढ़ाने और ग्लोबल साउथ की आवाज़ को मजबूत करने का ठोस आधार तैयार करती है। 

सम्मेलन का मुख्य विषय “ब्रिक्स: ग्लोबल साउथ के लिए एक मज़बूत आवाज़” रखा गया था, जिसमें दोनों देशों के बीच ब्रिक्स के अंतर्गत साझेदारी को और गहरा करने के उपायों पर चर्चा हुई।

16 से 21 अगस्त तक इन देशों की आधिकारिक यात्रा पर MEA सचिव 

सचिव रंगनाथन 16 से 21 अगस्त तक मिस्र, फ़िलिस्तीन और लेबनान की आधिकारिक यात्रा पर हैं। विदेश मंत्रालय के अनुसार यह उनकी मौजूदा भूमिका में इन देशों की पहली यात्रा है। यात्रा के दौरान वे अपने समकक्षों और प्रमुख हितधारकों से मुलाकात करेंगी। 

यात्रा का मकसद

मंत्रालय ने कहा कि इसका मकसद इन देशों के साथ भारत के मैत्रीपूर्ण संबंधों को और मजबूत करना तथा क्षेत्रीय घटनाक्रमों व आपसी हित के मुद्दों पर विचार-विमर्श करना है। 

इससे पहले 22 जुलाई को नई दिल्ली में सचिव रंगनाथन ने कॉन्सुलर मामलों पर भारत-UAE संयुक्त समिति (JCCA) की 7वीं बैठक की सह-अध्यक्षता की थी। बैठक में दोनों देशों ने एक-दूसरे के यहां रह रहे अपने नागरिकों की सुरक्षा, सम्मान और कल्याण सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता दोहराई थी। 

क्षेत्रीय सहयोग बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम

UAE की ओर से विदेश मंत्रालय के अंडरसेक्रेटरी उमर ओबैद मोहम्मद अलहेसन अलशमसी ने सह-अध्यक्षता की। यह दौरा भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान क्षेत्रीय सहयोग बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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