भारत में उच्च शिक्षा का विस्तार पिछले एक दशक में ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था की दिशा में देश की बढ़ती प्रतिबद्धता को दर्शाता है। संस्थानों की संख्या से लेकर छात्रों के नामांकन, महिलाओं की भागीदारी, अनुसंधान, स्टेम शिक्षा और बुनियादी ढांचे तक कई स्तरों पर बदलाव देखने को मिला है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 ने सर्वांगीण, बहु-विषयक और समान अवसर आधारित शिक्षा व्यवस्था की दिशा को और स्पष्ट किया है। ऑल इंडिया सर्वे ऑन हायर एजुकेशन (एआईएसएचई) के आंकड़े इस बदलाव की तस्वीर पेश करते हैं।
उच्च शिक्षा संस्थानों का नेटवर्क हुआ व्यापक
एआईएसएचई के अनुसार, 2014-15 से 2023-24 के बीच देश में उच्च शिक्षा संस्थानों के नेटवर्क में उल्लेखनीय विस्तार हुआ। विश्वविद्यालयों की संख्या 760 से बढ़कर 1,289 हो गई, यानी 69.6% की वृद्धि दर्ज की गई। इसी अवधि में कॉलेजों की संख्या 38,498 से बढ़कर 48,246 और स्टैंडअलोन संस्थानों की संख्या 12,276 से बढ़कर 15,221 हो गई। संस्थानों की बढ़ती संख्या ने देश के अलग-अलग हिस्सों में विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा के अवसरों का विस्तार किया है। इससे शिक्षा व्यवस्था अधिक सुलभ और विविध बनाने की दिशा में भी प्रगति हुई है।
उच्च शिक्षा में छात्रों का नामांकन बढ़ा
पिछले दशक में उच्च शिक्षा में कुल नामांकन 3.42 करोड़ से बढ़कर 4.50 करोड़ हो गया। यह 31.5% की वृद्धि है। वहीं, उच्च शिक्षा का सकल नामांकन अनुपात (जीईआर) 2014-15 के 23.7% से बढ़कर 2022-23 में 29.5% और 2023-24 में 30% हो गया। यह वृद्धि उच्च शिक्षा में भागीदारी के लगातार विस्तार को दर्शाती है और एनईपी 2020 के वर्ष 2035 तक जीईआर को 50% तक पहुंचाने के लक्ष्य की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति मानी जा सकती है।
पीएचडी और इंटीग्रेटेड पाठ्यक्रमों में तेज वृद्धि
2014-15 से 2023-24 के बीच अलग-अलग स्तरों पर नामांकन में भी महत्वपूर्ण बदलाव आया। पीएचडी में छात्रों की संख्या 1.17 लाख से बढ़कर 3.43 लाख हो गई, जो 192.89% की वृद्धि है। पोस्ट-ग्रेजुएट स्तर पर नामांकन 38.53 लाख से बढ़कर 57.85 लाख और अंडर-ग्रेजुएट स्तर पर 2.71 करोड़ से बढ़कर 3.45 करोड़ हो गया। डिप्लोमा पाठ्यक्रमों में नामांकन 25.08 लाख से बढ़कर 33.15 लाख और सर्टिफिकेट पाठ्यक्रमों में 1.70 लाख से बढ़कर 2.08 लाख हो गया। इंटीग्रेटेड पाठ्यक्रमों में सबसे तेज वृद्धि दर्ज हुई, जहां नामांकन 1.41 लाख से बढ़कर 5.69 लाख पहुंच गया।
उच्च शिक्षा में महिलाओं की भागीदारी मजबूत हुई
उच्च शिक्षा में महिलाओं के नामांकन में पिछले दशक के दौरान 42.2% की वृद्धि हुई। महिला छात्रों की संख्या 2014-15 में 1.57 करोड़ थी, जो 2023-24 में बढ़कर 2.24 करोड़ हो गई। महिलाओं का जीईआर भी 22.9% से बढ़कर 31.2% हो गया। खास बात यह है कि 2023-24 में महिलाओं का जीईआर पुरुषों के 28.9% से अधिक रहा। यह उच्च शिक्षा में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और शिक्षा तक उनकी पहुंच में सुधार का संकेत है। 2023-24 में पीएचडी में 1.71 लाख, पोस्ट-ग्रेजुएट में 32.53 लाख और अंडर-ग्रेजुएट स्तर पर 1.71 करोड़ छात्राएं नामांकित थीं। इसके अलावा पीजी डिप्लोमा में 91,332, डिप्लोमा में 13.27 लाख, सर्टिफिकेट में 1.10 लाख और इंटीग्रेटेड पाठ्यक्रमों में 2.73 लाख छात्राएं नामांकित थीं।
जेंडर पैरिटी में हुआ सुधार
उच्च शिक्षा में जेंडर पैरिटी इंडेक्स (जीपीआई) 2014-15 के 0.92 से बढ़कर 2023-24 में 1.08 हो गया। एससी श्रेणी में यह 0.91 से बढ़कर 1.11 और एसटी श्रेणी में 0.81 से बढ़कर 1.08 हो गया। जीपीआई का 1 होना पुरुषों और महिलाओं की समान भागीदारी को दर्शाता है, जबकि 1 से अधिक का स्तर महिलाओं की भागीदारी अधिक होने का संकेत देता है। आंकड़े बताते हैं कि उच्च शिक्षा में महिलाओं की भागीदारी के लिहाज से पिछले दशक में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
उच्च शिक्षा पूरी करने वालों की संख्या बढ़ी
उच्च शिक्षा से पास होकर निकलने वाले छात्रों की संख्या भी 2014-15 के 88.28 लाख से बढ़कर 2023-24 में 1.09 करोड़ से अधिक हो गई। इसमें 24.06% की वृद्धि दर्ज हुई। यह बदलाव बढ़ते नामांकन, छात्रों के उच्च शिक्षा में बने रहने, पाठ्यक्रम पूरा करने की बेहतर दर और संस्थानों की बढ़ी हुई क्षमता से जुड़ा है।
एससी, एसटी और ओबीसी की भागीदारी बढ़ी
उच्च शिक्षा में सामाजिक रूप से वंचित समूहों की भागीदारी में भी वृद्धि हुई है। कुल नामांकन में एससी छात्रों की हिस्सेदारी 2014-15 के 13.44% से बढ़कर 2023-24 में 15.5% हो गई। एसटी छात्रों की हिस्सेदारी 4.8% से बढ़कर 6.4% और ओबीसी छात्रों की हिस्सेदारी 32.8% से बढ़कर 40.1% हो गई। एससी छात्रों का जीईआर 18.9% से बढ़कर 27.8% और एसटी छात्रों का जीईआर 13.5% से बढ़कर 22.8% हो गया। ये आंकड़े उच्च शिक्षा में सामाजिक समावेश और भागीदारी के विस्तार की ओर संकेत करते हैं।
दिव्यांग छात्रों की भागीदारी में भी बढ़ोतरी
बेंचमार्क दिव्यांगता वाले व्यक्तियों (पीडब्ल्यूबीडी) का नामांकन 2014-15 के 64,298 से बढ़कर 2022-23 में 88,816 हो गया, जो 38.1% की वृद्धि है। हालांकि, आंकड़ों में लैंगिक अंतर भी दिखाई देता है। 2023-24 में 54,080 पीडब्ल्यूबीडी छात्र नामांकित थे, जिनमें 34,080 पुरुष और 20,000 महिलाएं थीं। इससे संकेत मिलता है कि उच्च शिक्षा में दिव्यांग महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए अभी और प्रयास की जरूरत है।
स्टेम शिक्षा में बढ़ी रुचि
विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित यानी स्टेम विषयों में भी छात्रों की भागीदारी बढ़ी है। 2014-15 में स्टेम में कुल नामांकन 91.5 लाख था, जो 2023-24 में बढ़कर 1.02 करोड़ हो गया। इस दौरान करीब 11.5% की वृद्धि दर्ज की गई। डिजिटल तकनीक, नवाचार, अनुसंधान और रोजगार के नए अवसरों के विस्तार के साथ स्टेम शिक्षा भारत की ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण आधार बनती जा रही है।
भारत में बढ़ा विदेशी छात्रों का आकर्षण
भारत के उच्च शिक्षा संस्थानों में विदेशी छात्रों की संख्या भी पिछले दशक में बढ़ी है। 2014-15 में 42,293 विदेशी छात्र भारत में उच्च शिक्षा ले रहे थे, जबकि 2023-24 में यह संख्या बढ़कर 58,134 हो गई। इसमें करीब 37.5% की वृद्धि हुई। यह भारतीय उच्च शिक्षा के बढ़ते अंतरराष्ट्रीयकरण, विदेशी संस्थानों के साथ अकादमिक सहयोग और वैश्विक स्तर पर भारतीय संस्थानों की बढ़ती पहचान को दर्शाता है।
शिक्षकों की संख्या में भी हुआ विस्तार
उच्च शिक्षा में शिक्षकों की संख्या 2014-15 में 14.73 लाख से बढ़कर 2023-24 में 17.32 लाख हो गई। यानी इस अवधि में 2.59 लाख शिक्षकों की वृद्धि हुई, जो करीब 17.6% है। महिला शिक्षकों की संख्या में इस दौरान 36.7% की वृद्धि दर्ज की गई। 2022-23 में कुल शिक्षण कार्यबल में महिला शिक्षकों की हिस्सेदारी 44.3% थी, जो 2023-24 में बढ़कर 44.9% हो गई। हालांकि, कुल शिक्षण कार्यबल में पुरुष शिक्षकों की हिस्सेदारी अभी भी अधिक है।
उच्च शिक्षा संस्थानों का इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत हुआ
पिछले दशक में उच्च शिक्षा संस्थानों में भौतिक और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर तथा महिलाओं और दिव्यांगों के लिए सुविधाओं का भी विस्तार हुआ। 2023-24 में 94% विश्वविद्यालयों, 95% कॉलेजों और 91% स्टैंडअलोन संस्थानों में खेल के मैदान उपलब्ध थे। लाइब्रेरी की सुविधा 98% विश्वविद्यालयों, 98% कॉलेजों और 98% स्टैंडअलोन संस्थानों में थी। प्रयोगशालाओं की सुविधा 89% विश्वविद्यालयों, 85% कॉलेजों और 94% स्टैंडअलोन संस्थानों में उपलब्ध थी। इसके अलावा अधिकांश संस्थानों में स्वास्थ्य केंद्र, कौशल विकास और कंप्यूटर सेंटर, ऑडिटोरियम तथा कॉन्फ्रेंस हॉल जैसी सुविधाएं भी मौजूद थीं।
एनईपी 2020 ने बदलाव की दिशा तय की
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 उच्च शिक्षा को अधिक बहु-विषयक, समावेशी और ज्ञान-केंद्रित बनाने पर जोर देती है। पिछले दशक के आंकड़ों में संस्थानों की संख्या, छात्र नामांकन, महिला भागीदारी, सामाजिक समूहों की भागीदारी, स्टेम शिक्षा, विदेशी छात्रों और शिक्षकों की संख्या में हुई वृद्धि इसी व्यापक बदलाव की तस्वीर पेश करती है। उच्च शिक्षा का विस्तार अब केवल संस्थानों की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं है। समान अवसर, गुणवत्ता, अनुसंधान, नवाचार, कौशल और सामाजिक समावेश भी शिक्षा व्यवस्था के महत्वपूर्ण हिस्से बन रहे हैं।
ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ता भारत
पिछले दशक की प्रगति भारत को ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ाने वाले महत्वपूर्ण आधार तैयार करती है। उच्च शिक्षा में बढ़ती भागीदारी, महिलाओं और वंचित समूहों की बढ़ती उपस्थिति, स्टेम शिक्षा का विस्तार और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर इस बदलाव को गति दे रहे हैं। आने वाले वर्षों में चुनौती इस प्रगति को व्यापक स्तर पर गुणवत्ता, अनुसंधान, रोजगार और नवाचार से जोड़ने की होगी। एनईपी 2020 के लक्ष्यों के अनुरूप एक ऐसी उच्च शिक्षा व्यवस्था तैयार करना महत्वपूर्ण होगा, जो पहुंच और समानता के साथ उत्कृष्टता को भी सुनिश्चित करे और भारत को वैश्विक ज्ञान केंद्र के रूप में स्थापित करने में योगदान दे।












