सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स की बढ़ती मांग ने दक्षिण कोरिया से भारत को निर्यात को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया है। सरकारी एजेंसी कोरिया ट्रेड-इन्वेस्टमेंट प्रमोशन एजेंसी (KOTRA) के आंकड़ों के अनुसार, साल के पहले आठ महीनों में भारत को कोरियाई निर्यात सालाना आधार पर 30.8 प्रतिशत बढ़कर 16.8 अरब डॉलर हो गया। पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 12.84 अरब डॉलर था।
मेक इन इंडिया और AI बूम का असर
KOTRA का कहना है कि भारत ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा सेंटर और संबंधित इंफ्रास्ट्रक्चर में भारी निवेश हो रहा है। इससे औद्योगिक गतिविधियां तेज हुई हैं और कोरियाई चिप निर्माता कंपनियों के साथ मटीरियल, पार्ट्स और इक्विपमेंट बनाने वाली फर्मों ने भारतीय बाजार में अपनी पैठ मजबूत की है।
KOTRA के प्रेसिडेंट और सीईओ कांग क्यूंग-सुंग ने कहा, “भारत को निर्यात में यह शानदार प्रदर्शन साफ दिखाता है कि ग्लोबल सप्लाई चेन में हो रहे बदलावों के बीच तेजी से बढ़ते भारतीय बाजार में कोरियाई कंपनियों के लिए और ज्यादा बिजनेस के मौके खुल रहे हैं।” उन्होंने बताया कि एजेंसी का लक्ष्य 2030 तक दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार को 50 अरब डॉलर तक पहुंचाना है। इसमें सेमीकंडक्टर से लेकर कंज्यूमर गुड्स तक कई सेक्टर शामिल हैं।
आयात भी बढ़ा, व्यापार संतुलन मजबूत
इसी अवधि में भारत से दक्षिण कोरिया का आयात 16.2 प्रतिशत बढ़कर 5.03 अरब डॉलर हो गया। पिछले साल यह 4.33 अरब डॉलर था। इससे कुल द्विपक्षीय व्यापार 21.8 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंच गया।
राजनीतिक स्तर पर भी रिश्ते मजबूत
अप्रैल में दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्युंग और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हुई बैठक में दोनों नेता कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट (CEPA) को अपग्रेड करने पर सहमत हुए थे। लक्ष्य 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना कर 50 अरब डॉलर तक पहुंचाना है।
जून में फ्रांस में G7 समिट के दौरान दोनों नेताओं ने फिर मुलाकात की। राष्ट्रपति ली ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि अर्थव्यवस्था, संस्कृति और समाज सहित सभी क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने और रिश्तों को नए स्तर पर ले जाने पर सहमति बनी है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों की अर्थव्यवस्था के आकार और क्षमता के मुकाबले अभी सहयोग काफी कम है।
प्रधानमंत्री मोदी ने भी इस मुलाकात को सकारात्मक बताया और कहा कि दोनों देश व्यापार, वाणिज्य और भविष्य के कई क्षेत्रों में मिलकर काम कर रहे हैं। चिप और टेक्नोलॉजी सेक्टर की मजबूत मांग के साथ राजनीतिक इच्छाशक्ति जुड़ने से भारत-दक्षिण कोरिया आर्थिक साझेदारी तेजी से आगे बढ़ रही है।















