भारत और थाईलैंड के बीच व्यापार तथा निवेश सहयोग को और मजबूत बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। थाईलैंड में भारतीय राजदूत पुनीत अग्रवाल ने गुरुवार को उप-प्रधानमंत्री एवं वाणिज्य मंत्री सुपाजी सुथंपुन से मुलाकात की। दोनों पक्षों ने आपसी सहयोग के नए क्षेत्रों की पहचान करने, टैरिफ व नॉन-टैरिफ बाधाओं को दूर करने और दोनों देशों के लिए लाभकारी संतुलित व्यापार सुनिश्चित करने पर विस्तार से चर्चा की।
हालिया उच्च-स्तरीय बैठकों का सिलसिला जारी
यह बैठक उन कई उच्च-स्तरीय वार्ताओं की कड़ी में हुई है, जो पिछले कुछ दिनों में दोनों देशों के बीच हुई हैं। इससे पहले 9 सितंबर को केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सुपाजी सुथंपुन के नेतृत्व वाले थाई प्रतिनिधिमंडल से नई दिल्ली में मुलाकात की थी। उस बैठक में व्यापार, निवेश, पर्यटन, लॉजिस्टिक्स, फार्मास्यूटिकल्स, खाद्य प्रसंस्करण, स्वच्छ ऊर्जा, ऑटोमोबाइल और अंतरिक्ष जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया था।
इससे पहले 12-13 सितंबर को थाईलैंड के उप-प्रधानमंत्री सिहासाक पुआंगकेटकेव 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए भारत आए थे। 7 सितंबर को भारतीय राजदूत ने थाईलैंड के विदेश मामलों के उप-मंत्री विजवत इसाराभकदी से भी मुलाकात कर रणनीतिक साझेदारी को मजबूत बनाने पर चर्चा की थी।
साझा हित और पूरक नीतियां
भारत और थाईलैंड के राजनयिक संबंध 1947 में स्थापित हुए थे। दोनों देशों ने 2022 में इन संबंधों की 75वीं वर्षगांठ मनाई थी। थाईलैंड की ‘एक्ट वेस्ट’ नीति भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति की पूरक मानी जाती है। दोनों देश समुद्री पड़ोसी भी हैं। द्विपक्षीय सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों में व्यापार-निवेश के साथ-साथ रक्षा-सुरक्षा, कनेक्टिविटी, संस्कृति, पर्यटन, शिक्षा, विज्ञान-प्रौद्योगिकी और लोगों के बीच आदान-प्रदान शामिल हैं।
थाईलैंड में भारतीय दूतावास ने इस बैठक को दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को और गहरा करने का महत्वपूर्ण अवसर बताया है। उम्मीद है कि इन निरंतर चर्चाओं से दोनों देशों के व्यवसायों और आम नागरिकों के लिए नए अवसर पैदा होंगे।















