जापान के नागोया में आयोजित एशियाई खेलों में भारतीय कुश्ती ने एक बार फिर देश का गौरव बढ़ाया है। भारत के युवा पहलवान अमन सहरावत ने पुरुषों के 57 किलोग्राम फ्रीस्टाइल वर्ग के फाइनल में शानदार प्रदर्शन करते हुए उत्तर कोरिया के विश्व चैंपियन चोंग सोंग हान को 11-7 से हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इस मुकाबले में अमन ने शुरुआत से ही आत्मविश्वास और रणनीतिक समझ का परिचय दिया। सामने अनुभवी और विश्व स्तर पर अपनी पहचान बना चुके चोंग सोंग हान थे, लेकिन अमन ने दबाव में आए बिना अपने खेल पर नियंत्रण बनाए रखा। उन्होंने अपनी गति, तकनीक और आक्रमण के सही समय का इस्तेमाल करते हुए मुकाबले में बढ़त बनाई और अंत तक इसे बरकरार रखा।
23 वर्षीय अमन सहरावत के लिए यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वह पहले ही हांगझोऊ एशियाई खेलों में कांस्य पदक जीत चुके हैं। उस प्रदर्शन के बाद उन्होंने लगातार अपनी तकनीक और फिटनेस पर काम किया और बड़े मंच पर बेहतर परिणाम हासिल करने का लक्ष्य बनाए रखा। नागोया में उनका स्वर्ण पदक उसी निरंतर मेहनत और तैयारी का परिणाम माना जा रहा है। फाइनल मुकाबले में अमन ने अपने प्रतिद्वंद्वी की रणनीति को समझते हुए आक्रामक और रक्षात्मक दोनों पहलुओं का संतुलित इस्तेमाल किया। चोंग सोंग हान ने कई मौकों पर वापसी की कोशिश की, लेकिन भारतीय पहलवान ने महत्वपूर्ण क्षणों में अंक हासिल कर अपनी बढ़त बनाए रखी।
अमन की इस जीत ने भारतीय कुश्ती के मजबूत प्रदर्शन को और मजबूती दी है। इससे एक दिन पहले भारतीय पहलवान सुजीत कलकल ने पुरुषों के 65 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर देश को बड़ी सफलता दिलाई थी। लगातार दो दिनों में कुश्ती में स्वर्ण पदक मिलने से भारतीय दल के प्रदर्शन को नई ऊर्जा मिली है। भारतीय पहलवानों ने अपनी तकनीकी क्षमता, शारीरिक फिटनेस और मानसिक मजबूती का प्रभावी प्रदर्शन किया है।
अमन सहरावत का स्वर्ण पदक उनके व्यक्तिगत करियर की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में शामिल हो गया है। हांगझोऊ में कांस्य से लेकर नागोया में स्वर्ण तक का उनका सफर यह दिखाता है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनुभव हासिल करने के साथ उन्होंने अपने प्रदर्शन में लगातार सुधार किया है। नागोया के फाइनल में 11-7 की जीत के साथ अमन ने न केवल स्वर्ण पदक हासिल किया, बल्कि भारतीय कुश्ती के लिए एक और यादगार अध्याय भी जोड़ दिया। उनकी सफलता से देशभर के खेल प्रेमियों में उत्साह है और युवा पहलवानों को भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर बेहतर प्रदर्शन करने की प्रेरणा मिली है।















