रायपुर, 7 नवंबर। छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने भगवान बिरसा मुंडा की जयंती को ‘जनजाति गौरव दिवस’ के बजाय ‘आदिवासी गौरव दिवस’ के रूप में मनाने की मांग की है।
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा आदिवासी समाज की विशिष्ट पहचान समाप्त कर उसे जनजाति और वनवासी के रूप में संबोधित करने का प्रयास कर रही है।
बैज ने कहा कि, भगवान बिरसा मुंडा आदिवासी समाज के गौरव, स्वाभिमान और संघर्ष के प्रतीक हैं। उनकी जयंती आदिवासी गौरव दिवस के रूप में मनाई जानी चाहिए। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के छत्तीसगढ़ आगमन पर जनजाति गौरव दिवस का आयोजन किया जा रहा है, जबकि आदिवासी समाज स्वयं को आदिवासी कहलाना चाहता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि, भाजपा ने विश्व आदिवासी दिवस का भी विरोध किया था। आदिवासी समाज अपनी संस्कृति, परंपरा और विरासत पर गर्व करता है, लेकिन भाजपा उस पर जनजाति की पहचान थोपने का प्रयास कर रही है। आदिम जाति कल्याण विभाग का नाम बदलना भी इसी मानसिकता को दर्शाता है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि, आरएसएस की विचारधारा के प्रभाव में भाजपा सरकार आदिवासी संस्कृति और विशिष्ट पहचान को प्रभावित करना चाहती है। छत्तीसगढ़ की पहचान यहां के आदिवासी समाज, उसकी भाषा, परंपराओं और जीवनशैली से है। सरकार को उनकी भावनाओं का सम्मान करना चाहिए।
बैज ने सवाल किया कि, विभाग का नाम बदलने से आदिवासी परिवारों को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और आर्थिक विकास के क्षेत्र में क्या लाभ मिला? उन्होंने कहा कि नाम बदलने के बजाय सरकार को आदिवासी समाज के वास्तविक विकास पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने मांग की कि भगवान बिरसा मुंडा की जयंती को जनजाति गौरव दिवस के स्थान पर आदिवासी गौरव दिवस के रूप में मनाया जाए।












