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क्या एक फेफड़े से भी जिंदा रह सकता है इंसान, जानें भयंकर निमोनिया में कैसे बचाई जाती है जान?

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क्या एक फेफड़े से भी जिंदा रह सकता है इंसान, जानें भयंकर निमोनिया में कैसे बचाई जाती है जान?

हमारे देश में निमोनिया एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या बना हुआ है. लेकिन इसके बारे में जागरूकता अभी भी काफी कम है. यह फेफड़ों से जुड़ा एक ऐसा संक्रमण है जो समय पर पहचान और इलाज न मिलने पर जानलेवा भी साबित हो सकता है. खास बात यह है कि कई मामलों में यह बीमारी इतनी गंभीर हो जाती है कि मरीज का एक फेफड़ा तक निकलना पड़ जाता है. ऐसे में अक्सर लोगों के सवाल आते हैं कि क्या एक फेफड़ों के सारे भी इंसान जिंदा रह सकता है. तो चलिए आज हम आपको बताते हैं कि क्या इंसान एक फेफड़ों के सहारे भी जिंदा रह सकता है और भयंकर निमोनिया में जान कैसे बचाई जाती है?

क्या होता है निमोनिया और क्यों है खतरनाक?

निमोनिया फेफड़ों का इंफेक्शन है, जो बैक्टीरिया, वायरस या फंगस के कारण होता है. इसमें फेफड़ों की वायु थैलियों में म्यूकस भर जाता है. जिससे सांस लेने में दिक्कत होती है. इसकी सामान्य लक्षणों में तेज बुखार, सीने में दर्द, कमजोरी और सांस फूलना शामिल है. बच्चे, बुजुर्ग, स्मोकिंग करने वाले, कमजोर इम्यूनिटी वाले लोग और पुरानी बीमारियों से जुड़े मरीज इसके ज्यादा खतरे में रहते हैं ‌

कैसे होती है निमोनिया की पहचान और इलाज?

डॉक्टर आमतौर पर जांच करते हैं और जरूरत पड़ने पर एक्स-रे या ब्लड टेस्ट के जरिए निमोनिया की पुष्टि करते हैं. इस बीमारी की वजह के अनुसार एंटीबायोटिक, एंटीवायरस या दूसरी दवाएं दी जाती है. गंभीर मामलों में ऑक्सीजन सपोर्ट या हॉस्पिटल में एडमिट करने की जरूरत भी पड़ती है. वहीं कुछ मामलों में निमोनिया या अन्य गंभीर इन्फेक्शन फेफड़ों को इतना नुकसान पहुंचा देते हैं कि उन्हें बचाना संभव नहीं होता है. ऐसे में न्यूमोनेक्टॉमी नाम की सर्जरी के जरिए पूरा फेफड़ा निकालना पड़ सकता है. यह स्थिति आमतौर पर खतरनाक इन्फेक्शन, टीबी, फंगल इन्फेक्शन या कैंसर जैसी बीमारियों में सामने आती है.क्या एक फेफड़ों के सहारे भी जिंदा रह सकता है इंसान?

एक्सपर्ट्स के अनुसार शरीर में अडॉप्शन की क्षमता होती है. अगर एक फेफड़ा निकाल दिया जाए तो दूसरा फेफड़ा धीरे-धीरे ज्यादा काम करने लगता है और शरीर की जरूरत के हिसाब से खुद को ढाल लेता है. ऐसे मरीज समय के साथ अपनी क्षमता का बड़ा हिस्सा वापस पा लेते हैं और रोजमर्रा का जीवन जी सकते हैं. हालांकि उन्हें भारी फिजिकल एक्टिविटी करने में दिक्कत हो सकती है और सांस जल्दी फूल सकती है, लेकिन सही देखभाल के साथ नॉर्मल जीवन भी संभव है.

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