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अप्रैल में औद्योगिक उत्पादन वृद्धि बढ़कर 1.7%, स्टील-सीमेंट सेक्टर ने संभाली रफ्तार


व्यापार 21 May 2026
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अप्रैल में औद्योगिक उत्पादन वृद्धि बढ़कर 1.7%, स्टील-सीमेंट सेक्टर ने संभाली रफ्तार

बिजनेस: भारत के औद्योगिक उत्पादन से जुड़े ताज़ा सरकारी आंकड़ों के अनुसार अप्रैल माह में देश के मुख्य औद्योगिक उत्पादन (IIP) की वृद्धि दर बढ़कर 1.7 प्रतिशत हो गई है। इससे पिछले महीने यह आंकड़ा 1.2 प्रतिशत था, जिसे बाद में संशोधित किया गया था। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी इन आंकड़ों से संकेत मिलता है कि बुनियादी ढांचे से जुड़े क्षेत्रों के मजबूत प्रदर्शन ने औद्योगिक गतिविधियों को सहारा दिया है। आंकड़ों के मुताबिक, स्टील और सीमेंट जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर ने इस वृद्धि में प्रमुख भूमिका निभाई।

सीमेंट उत्पादन में साल-दर-साल आधार पर 9.4 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। यह वृद्धि निर्माण गतिविधियों और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में तेजी का संकेत देती है। वहीं, स्टील उत्पादन भी 6.2 प्रतिशत बढ़ा, जो औद्योगिक और निर्माण क्षेत्र की मांग में सुधार को दर्शाता है। इसके अलावा, बिजली उत्पादन में भी बढ़ोतरी देखने को मिली। अप्रैल में बिजली उत्पादन पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 4.1 प्रतिशत अधिक रहा। यह औद्योगिक और घरेलू दोनों स्तर पर ऊर्जा खपत में वृद्धि को दर्शाता है।

हालांकि, कुल औद्योगिक उत्पादन में सुधार के बावजूद कई प्रमुख क्षेत्रों में गिरावट भी दर्ज की गई है। कोयला उत्पादन सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में रहा, जिसमें साल-दर-साल आधार पर 8.7 प्रतिशत की गिरावट देखी गई। कोयले की यह गिरावट ऊर्जा और खनन क्षेत्र के लिए चिंता का विषय मानी जा रही है। उर्वरक उत्पादन में भी 8.6 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई, जो कृषि क्षेत्र से जुड़े इनपुट सप्लाई पर असर डाल सकती है। इसके अलावा कच्चे तेल के उत्पादन में 3.9 प्रतिशत की गिरावट आई, जो ऊर्जा उत्पादन में सीमित वृद्धि को दर्शाता है।

आंकड़ों के अनुसार प्राकृतिक गैस उत्पादन में भी 4.3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जबकि पेट्रोलियम रिफाइनरी उत्पादों के उत्पादन में मामूली 0.5 प्रतिशत की कमी देखी गई। ये आंकड़े ऊर्जा क्षेत्र में मिश्रित प्रदर्शन को दर्शाते हैं, जहां कुछ क्षेत्रों में सुधार तो कुछ में गिरावट जारी है। विशेषज्ञों का मानना है कि औद्योगिक उत्पादन में यह हल्की वृद्धि मुख्य रूप से बुनियादी ढांचा और निर्माण गतिविधियों में सुधार के कारण है।

हालांकि, ऊर्जा और कच्चे माल से जुड़े क्षेत्रों में गिरावट चिंता का संकेत है, जिसे भविष्य में संतुलित करने की आवश्यकता होगी। कुल मिलाकर, अप्रैल के आंकड़े यह संकेत देते हैं कि भारतीय उद्योग धीरे-धीरे स्थिर विकास की ओर बढ़ रहा है, लेकिन विभिन्न क्षेत्रों में असमान प्रदर्शन को देखते हुए निरंतर नीतिगत समर्थन और सुधार की आवश्यकता बनी हुई है।


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