अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि उन्होंने अपने प्रतिनिधियों को ईरान के साथ किसी भी समझौते में जल्दबाजी न करने के लिए कहा है, क्योंकि उनके प्रशासन ने तीन महीने से चल रहे युद्ध में तत्काल सफलता की उम्मीदों को कम कर दिया है।
श्री ट्रंप ने आगे कहा कि उनके प्रशासन के तहत ईरान के साथ होने वाले किसी भी भावी समझौते में कोई वित्तीय रियायत शामिल नहीं होगी और यह पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल में हुए समझौते से मौलिक रूप से भिन्न होगा। उन्होंने ओबामा काल के ईरान परमाणु समझौते की भी आलोचना की और दावा किया कि उनके प्रस्तावित समझौते से तेहरान को परमाणु हथियार प्राप्त करने से रोका जा सकेगा और यह समझौता पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा द्वारा तैयार किए गए समझौते से अलग होगा।
अमेरिकी मीडिया के अनुसार, विचाराधीन समझौते में 60 दिनों के लिए युद्धविराम का विस्तार, होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलना और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर आगे की बातचीत शामिल है। प्रस्तावित समझौते को लेकर रिपब्लिकन पार्टी में मतभेद हैं, कुछ का कहना है कि यह ईरान के प्रति बहुत नरम रुख अपनाता है। सीनेटर टेड क्रूज़ ने इसे एक विनाशकारी गलती बताया, जबकि सीनेट सशस्त्र सेवा समिति के अध्यक्ष रोजर विकर ने कहा कि 60 दिनों के युद्धविराम का मतलब होगा कि ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के तहत हासिल की गई हर उपलब्धि व्यर्थ हो जाएगी।
28 फरवरी को अमेरिका और इज़राइल ने ईरान पर व्यापक हमले किए, जिससे पश्चिम एशिया में संघर्ष छिड़ गया। ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए इज़राइल और खाड़ी में स्थित अमेरिका के सहयोगी देशों पर हमले किए।
















