महाराष्ट्र: देश में पिछले 10 दिनों के भीतर चौथी बार फ्यूल की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद ट्रांसपोर्ट सेक्टर गंभीर आर्थिक दबाव का सामना कर रहा है। लगातार बढ़ती डीज़ल कीमतों ने ट्रांसपोर्ट कंपनियों की लागत बढ़ा दी है, जिससे पूरे परिवहन तंत्र पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। जानकारी के अनुसार, 15 मई से अब तक डीज़ल की कीमतों में लगभग 8 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हो चुकी है। इस तेज़ वृद्धि के कारण ट्रांसपोर्ट कंपनियों की परिचालन लागत में अचानक इजाफा हुआ है और छोटे-बड़े दोनों स्तर के ऑपरेटरों के लिए कामकाज मुश्किल होता जा रहा है।
सोमवार को ट्रांसपोर्ट इंडस्ट्री से जुड़े संगठनों ने चेतावनी जारी करते हुए कहा कि अगर फ्यूल की कीमतों में यही रफ्तार बनी रही, तो आने वाले दिनों में देश की सप्लाई चेन पर सीधा असर देखने को मिल सकता है। उनका कहना है कि सामानों की ढुलाई महंगी होने से जरूरी वस्तुओं की कीमतें भी प्रभावित हो सकती हैं। ट्रांसपोर्टरों के अनुसार, डीज़ल उनकी कुल लागत का सबसे बड़ा हिस्सा होता है और बार-बार बढ़ोतरी से उनके मुनाफे पर भारी दबाव पड़ रहा है। कई छोटे ट्रांसपोर्ट ऑपरेटरों ने यह भी आशंका जताई है कि अगर स्थिति नहीं सुधरी तो उन्हें अपने रूट या सेवाएं कम करनी पड़ सकती हैं। उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि फ्यूल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी का असर केवल ट्रांसपोर्ट तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका प्रभाव खाद्य सामग्री, निर्माण सामग्री और रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ता है। इससे महंगाई का दबाव और बढ़ सकता है।
ट्रांसपोर्ट संगठनों ने सरकार से फ्यूल कीमतों को स्थिर करने और राहत देने की मांग की है ताकि सप्लाई चेन सुचारु रूप से चलती रहे और आम जनता पर अतिरिक्त बोझ न पड़े। फिलहाल बाजार में स्थिति को लेकर चिंता बनी हुई है और आने वाले दिनों में इसका असर माल ढुलाई और उपभोक्ता कीमतों पर देखने को मिल सकता है।















