हैदराबाद, 13 जून। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को हैदराबाद के वायु सेना अकादमी में आयोजित 217वीं संयुक्त दीक्षांत परेड (कॉम्बाइंड ग्रेजुएशन परेड) का निरीक्षण किया और नवनियुक्त अधिकारियों से आधुनिक युद्ध की बदलती चुनौतियों के अनुरूप स्वयं को निरंतर तैयार रखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भविष्य के युद्धों में ड्रोन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), साइबर क्षमताएं, रोबोटिक्स और अंतरिक्ष आधारित तकनीकें निर्णायक भूमिका निभाने वाली हैं, इसलिए सैन्य अधिकारियों को तकनीकी रूप से दक्ष और रणनीतिक रूप से सजग रहना होगा।
परेड की सलामी लेने के बाद रक्षा मंत्री ने भारतीय वायु सेना में शामिल होने वाले नव-नियुक्त अधिकारियों को बधाई देते हुए कहा कि सशस्त्र बलों में सेवा केवल एक पेशा नहीं, बल्कि राष्ट्र के प्रति सर्वोच्च समर्पण का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि एक सैनिक और अधिकारी के लिए अनुशासन, कर्तव्यनिष्ठा, नेतृत्व क्षमता तथा निरंतर सीखने की भावना सबसे महत्वपूर्ण गुण हैं।
अपने संबोधन में राजनाथ सिंह ने कहा कि पारंपरिक युद्धों का स्वरूप अब तेजी से बदल रहा है। पहले युद्ध सैनिकों और हथियारों की संख्या के आधार पर लड़े जाते थे, लेकिन आज युद्धक्षेत्र तकनीक आधारित हो चुका है। ड्रोन, उपग्रह, साइबर युद्ध, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, स्वायत्त हथियार प्रणाली और उन्नत निगरानी तंत्र आधुनिक सैन्य अभियानों का अभिन्न हिस्सा बन चुके हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में खतरे केवल सीमाओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि डिजिटल और साइबर क्षेत्र में भी नए प्रकार की चुनौतियां सामने आ रही हैं।
रक्षा मंत्री ने अधिकारियों से कहा कि वे केवल वर्तमान तकनीकों तक सीमित न रहें, बल्कि भविष्य की युद्ध प्रणालियों और उभरती तकनीकों को समझने तथा अपनाने की क्षमता विकसित करें। उन्होंने कहा कि आधुनिक सैन्य नेतृत्व की पहचान बदलती परिस्थितियों के अनुरूप स्वयं को ढालने और नई तकनीकों का प्रभावी उपयोग करने में है।
उन्होंने कहा कि वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य लगातार बदल रहा है और सैन्य अधिकारियों को हर स्थिति का त्वरित आकलन करने, संसाधनों का बेहतर उपयोग करने तथा आवश्यकता पड़ने पर अपनी रणनीतियों को पुनर्गठित करने की क्षमता विकसित करनी होगी। एक सफल सैन्य अधिकारी वही होता है जो कठिन और अनिश्चित परिस्थितियों में भी सही निर्णय लेने में सक्षम हो।
राजनाथ सिंह ने अधिकारियों को “हार्ड वर्क” के साथ “स्मार्ट वर्क” अपनाने की भी सलाह दी। उन्होंने कहा कि आज का दौर नवाचार, अनुसंधान और तकनीकी उत्कृष्टता का है। दुनिया में वही राष्ट्र आगे बढ़ रहे हैं जिन्होंने विज्ञान और तकनीक को अपनी सामरिक शक्ति का आधार बनाया है।
उन्होंने कहा कि अब केवल बड़े और संसाधन-संपन्न देशों को ही रणनीतिक बढ़त नहीं मिलती, बल्कि छोटे देश भी अत्याधुनिक तकनीक, उन्नत हथियार प्रणालियों और नवोन्मेषी सैन्य रणनीतियों के बल पर वैश्विक स्तर पर प्रभावशाली भूमिका निभा रहे हैं।
रक्षा मंत्री ने कहा कि विश्व में होने वाले प्रत्येक युद्ध और संघर्ष से सैन्य रणनीतिकारों को सीखने का अवसर मिलता है। उन्होंने अधिकारियों से आग्रह किया कि वे अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों और समकालीन युद्धों का अध्ययन करें तथा उनसे प्राप्त अनुभवों को अपने प्रशिक्षण और कार्यशैली का हिस्सा बनाएं। उनके अनुसार निरंतर सीखना और स्वयं को अद्यतन रखना किसी भी सैन्य अधिकारी की सबसे बड़ी ताकत है।
अपने संबोधन के अंत में रक्षा मंत्री ने नवनियुक्त अधिकारियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि राष्ट्र को उनसे बड़ी उम्मीदें हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ये युवा अधिकारी भारतीय वायु सेना की गौरवशाली परंपराओं को आगे बढ़ाते हुए देश की सुरक्षा, संप्रभुता और सम्मान की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
वास्तव में यह 217वीं संयुक्त दीक्षांत परेड कई दृष्टियों से ऐतिहासिक रही। यह राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) में प्रशिक्षित महिला कैडेटों के पहले बैच की भारतीय वायु सेना में कमीशनिंग का भी महत्वपूर्ण अवसर बना। महिला कैडेटों ने एनडीए से स्नातक होने के बाद वायु सेना अकादमी में शाखा-विशिष्ट प्रशिक्षण प्राप्त किया और अब वे भारतीय वायु सेना की अधिकारी के रूप में सेवा देंगी। इसे भारतीय सशस्त्र बलों में लैंगिक समानता और महिला सशक्तीकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि माना जा रहा है।
समारोह का आकर्षण भारतीय वायु सेना की हवाई प्रदर्शन टीमों का शानदार प्रदर्शन भी रहा। सुखोई एसयू-30एमकेआई लड़ाकू विमानों ने अपनी युद्धक क्षमता का प्रदर्शन किया, जबकि सारंग हेलीकॉप्टर डिस्प्ले टीम और सूर्यकिरण एरोबेटिक टीम ने आकाश में रोमांचक करतब दिखाकर उपस्थित दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
इस अवसर पर वरिष्ठ सैन्य अधिकारी, प्रशिक्षक, कैडेटों के परिजन और बड़ी संख्या में आमंत्रित अतिथि मौजूद रहे। पूरा समारोह भारतीय वायु सेना की पेशेवर दक्षता, अत्याधुनिक प्रशिक्षण व्यवस्था और देश की बढ़ती रक्षा क्षमताओं की प्रभावशाली झलक प्रस्तुत करता नजर आया।
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