भारत में कमर्शियल और इंडस्ट्रियल (C&I) सेगमेंट की रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता 2032 तक तीन गुना बढ़कर 100 गीगावाट हो जाने की उम्मीद है। 2025 में यह क्षमता 32 गीगावाट रही। साथ ही, एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (ESS) की स्थापित क्षमता 10 गुना से अधिक बढ़कर 31 गीगावाट-घंटा पहुंचने का अनुमान है।
यह जानकारी इंडिया एनर्जी स्टोरेज एलायंस (IESA) और कस्टमाइज्ड एनर्जी सॉल्यूशंस द्वारा जारी एक नई रिपोर्ट में दी गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस तेज वृद्धि के पीछे कंपनियों के डीकार्बोनाइजेशन लक्ष्य, बढ़ते ग्रिड टैरिफ, ऊर्जा सुरक्षा की जरूरत और राज्य स्तर पर नवीन नियामक नीतियां मुख्य कारण हैं।
प्रमुख बातें
– महाराष्ट्र की नई रिन्यूएबल एनर्जी और स्टोरेज पॉलिसी के तहत 100 किलोवाट से अधिक क्षमता वाले हर नए रिन्यूएबल प्रोजेक्ट के साथ स्टोरेज अनिवार्य किया गया है।
– डिस्कॉम्स को वित्त वर्ष 2035-36 तक अपनी कुल बिजली का 10% स्टोरेज से प्राप्त करना होगा।
– गुजरात, कर्नाटक, तमिलनाडु और राजस्थान भी कॉस्ट-रिफ्लेक्टिव बैंकिंग, ट्रांसमिशन चार्ज में छूट और अन्य सुविधाओं के जरिए इस क्षेत्र को बढ़ावा दे रहे हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि इंडस्ट्रियल यूनिट्स स्टोरेज तकनीक को अपनाने में सबसे आगे रहेंगी और कुल इंस्टॉलेशन में इनकी हिस्सेदारी 50% से अधिक होगी। इसके अलावा डेटा सेंटर, अस्पताल, मेट्रो, रेलवे स्टेशन और एयरपोर्ट जैसी महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर सुविधाओं में स्टोरेज की मांग सबसे तेजी से बढ़ेगी।
आईईएसडब्ल्यू 2026 में होगी रिपोर्ट लॉन्च
यह रिपोर्ट 8-10 जुलाई 2026 को नई दिल्ली के यशोभूमि (IICC) में आयोजित होने वाले ‘इंडिया एनर्जी स्टोरेज वीक (IESW) 2026’ में जारी की जाएगी। इस कार्यक्रम में 200 से अधिक प्रदर्शक और 10,000 से ज्यादा इंडस्ट्री लीडर्स भाग लेंगे।
IESW के अध्यक्ष देबमाल्य सेन ने कहा, “हमारी नई रिसर्च से पता चलता है कि भारत का कमर्शियल और इंडस्ट्रियल (C&I) एनर्जी स्टोरेज मार्केट न सिर्फ बढ़ रहा है, बल्कि एक नए दौर की ओर तेजी से बढ़ रहा है। राज्य सरकारों की दूरदर्शी नीतियों और कॉर्पोरेट क्षेत्र की बढ़ती मांग के कारण स्टोरेज अब मात्र बैकअप नहीं, बल्कि मजबूती और डीकार्बोनाइजेशन का अहम रणनीतिक टूल बन चुका है।”
यह आयोजन स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण को तेज करने, नीतिगत रुकावटों को दूर करने और व्यावहारिक समाधान निकालने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच साबित होगा। भारत के क्लीन एनर्जी लक्ष्यों को हासिल करने में C&I सेगमेंट और एनर्जी स्टोरेज की भूमिका तेजी से बढ़ती जा रही है।















