केंद्र सरकार ने देशभर में 58 आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (AI-CoEs) और 543 डेटा एवं एआई लैब स्थापित करने को मंजूरी दी है। वहीं, इंडियाएआई मिशन ने 62 मंत्रालयों और विभागों में 762 एआई उपयोग मामलों (AI Use Cases) की पहचान की है। यह जानकारी इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने लोकसभा में एक लिखित उत्तर में दी।
मंत्री ने बताया कि इंडियाएआई एप्लिकेशन डेवलपमेंट इनिशिएटिव (IADI) के तहत अप्रैल में सार्वजनिक सेवा वितरण में एआई के उपयोग पर एक कार्यशाला आयोजित की गई थी। इस पहल के माध्यम से विभिन्न मंत्रालयों और विभागों को अपने डेटा संसाधनों का आकलन करने, संभावित एआई उपयोग मामलों की पहचान करने तथा सुशासन और सार्वजनिक सेवाओं के लिए एआई रोडमैप तैयार करने में सहायता मिली।
उन्होंने कहा कि IADI के तहत स्वास्थ्य, कृषि, सुशासन, जलवायु परिवर्तन, साइबर सुरक्षा और वित्तीय विनियमन जैसे प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में एआई आधारित समाधानों की श्रृंखला तैयार की गई है, जिन्हें विचार से लेकर पायलट परियोजनाओं और बड़े स्तर पर लागू करने तक विकसित किया जा रहा है।
सरकार ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की सरकारों तथा उद्योग भागीदारों के सहयोग से 58 एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करने की योजना को मंजूरी दी है। इस योजना के तहत तमिलनाडु में दो एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए जाएंगे।
इसके अलावा, इंडियाएआई फ्यूचर स्किल्स पहल के अंतर्गत देश के टियर-2 और टियर-3 शहरों के आईटीआई और पॉलिटेक्निक संस्थानों में 543 डेटा एवं एआई लैब स्थापित करने की मंजूरी दी गई है। इन लैब में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डेटा एनोटेशन, डेटा क्यूरेशन और एप्लाइड डेटा साइंस का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इनमें से 18 लैब तमिलनाडु में स्थापित की जाएंगी।
मंत्री ने बताया कि इंडियाएआई फ्यूचर स्किल्स के तहत स्नातक, स्नातकोत्तर और पीएचडी छात्रों को एआई शिक्षा और अनुसंधान के लिए फेलोशिप भी प्रदान की जा रही है। अब तक देशभर के 178 संस्थानों में 686 फेलोशिप प्रदान की गई हैं। इनमें तमिलनाडु के 162 छात्र शामिल हैं, जिनमें 96 स्नातक, 34 स्नातकोत्तर और 32 पीएचडी छात्र हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि देश में इंडियाएआई सेफ्टी इंस्टीट्यूट की स्थापना की जा रही है, जो कृत्रिम बुद्धिमत्ता की सुरक्षा से जुड़े स्वदेशी अनुसंधान एवं विकास का प्रमुख केंद्र होगा। इसका उद्देश्य एआई गवर्नेंस के क्षेत्र में भारत की तकनीकी और संस्थागत क्षमता को और मजबूत करना है।















