भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने सोमवार को कहा कि बढ़ते जटिल और आपस में जुड़े साइबर खतरों के मद्देनजर भारत के वित्तीय क्षेत्र को समय-समय पर नियमों का पालन करने के बजाय लगातार जोखिम-आधारित साइबर रेज़िलिएंस की ओर बढ़ना चाहिए।
SEBI द्वारा 17 से 21 अगस्त 2026 तक मुंबई में आयोजित साइबर डिफेंस संगोष्ठी में पांडे ने जोर दिया कि वित्तीय संस्थानों के लिए अब मुख्य सवाल यह नहीं है कि साइबर हमला होगा या नहीं, बल्कि यह है कि वे किसी घटना का कितनी तेजी से पता लगा सकते हैं, उसे रोक सकते हैं, उससे उबर सकते हैं और सबक ले सकते हैं।
इस संगोष्ठी में घरेलू प्रतिभागियों के साथ 15 IOSCO क्षेत्रों के अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधि, वित्तीय नियामक, विनियमित संस्थाएं, तकनीकी संस्थान और शिक्षा जगत के विशेषज्ञ शामिल हो रहे हैं। इसे क्लासरूम सत्र, टेबलटॉप एक्सरसाइज में रोल-प्ले और साइबर रेंज प्लेटफॉर्म पर रियल-टाइम सिमुलेशन के जरिए व्यावहारिक अनुभव देने के लिए डिजाइन किया गया है।
पांडे ने प्रतिभागियों से आग्रह किया कि वे इन अभ्यासों का इस्तेमाल दबाव की स्थिति में अपनी तैयारियों की खामियों को पहचानने के लिए करें। उन्होंने कहा, “आज की साइबर सुरक्षा एक व्यापक इकोसिस्टम के प्रयासों का नतीजा है, जिसमें नियामक, वित्तीय संस्थान, शिक्षा जगत और तकनीकी संस्थान सब अपना योगदान दे रहे हैं।”
उन्होंने वित्तीय इकोसिस्टम में बेहतर सहयोग की जरूरत पर जोर दिया। उद्घाटन समारोह में SEBI ने सिक्योरिटीज मार्केट इकोसिस्टम में सूचना साझा करने और समन्वित प्रतिक्रिया मजबूत करने के लिए दो पोर्टल लॉन्च किए। SEBI इंसिडेंट रिपोर्टिंग पोर्टल साइबर घटनाओं की रिपोर्टिंग को अधिक व्यवस्थित, समय पर और कार्रवाई योग्य बनाएगा, जबकि साइबर सुरक्षा पोर्टल ज्ञान, कमजोरियों की चेतावनी, नीतिगत उपायों और घटना संबंधी जानकारी साझा करने का केंद्रीय केंद्र बनेगा।
पांडे ने कमजोरियों और पैच मैनेजमेंट पर मौलिक रूप से पुनर्विचार करने का भी आह्वान किया। उन्होंने लगातार खोज, मूल्यांकन, प्राथमिकता निर्धारण, समाधान और सत्यापन के चक्र की वकालत की, जो इंटेलिजेंट और तेज ऑटोमेटेड पैच मैनेजमेंट से समर्थित हो। उन्होंने क्वांटम कंप्यूटिंग को उभरती चुनौती बताते हुए पोस्ट-क्वांटम क्रिप्टोग्राफी को वर्तमान माइग्रेशन प्रोग्राम का हिस्सा बनाने और “क्रिप्टो-एजिलिटी” विकसित करने की सलाह दी।
उन्होंने जोर दिया कि साइबर सुरक्षा अब केवल आईटी का मुद्दा नहीं, बल्कि बोर्ड-स्तर, बिजनेस निरंतरता, बाजार अखंडता और निवेशकों के भरोसे से जुड़ा विषय है। पांडे ने अपनी बात तीन प्राथमिकताओं—सहयोग, तैयारी और प्रतिक्रिया—के साथ समाप्त की तथा निरंतर सीखने और सामूहिक लचीलेपन के जरिए साइबर सुरक्षा को मजबूत करने का आह्वान किया।















