संयुक्त राष्ट्र महासभा में विश्व नेताओं ने कहा कि बढ़ती युवा आबादी तभी वैश्विक समृद्धि का आधार बन सकती है, जब देशों में युवाओं को अच्छी शिक्षा, जरूरी कौशल, तकनीक तक पहुंच और सम्मानजनक रोजगार के अवसर मिलें। नेताओं ने साथ ही चेतावनी दी कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) असमानता को बढ़ा सकती है और रोजगार के भविष्य को लेकर युवाओं की चिंता बढ़ा सकती है।
जाम्बिया के विदेश मंत्री मुलाम्बो हामाकुनी हैम्बे ने कहा कि अफ्रीका की तेजी से बढ़ती युवा आबादी केवल महाद्वीप के लिए ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए बड़ा अवसर है। उन्होंने कहा कि 2050 तक दुनिया के हर चार युवाओं में से एक अफ्रीका से होगा। ऐसे में सरकारों को युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, रोजगार के अनुरूप कौशल, तकनीक तक पहुंच, उद्यमिता के अवसर और सम्मानजनक रोजगार उपलब्ध कराने होंगे।
कई देशों ने रोजगार को आर्थिक मजबूती और राजनीतिक स्थिरता से भी जोड़ा। इंडोनेशिया के विदेश मंत्री सुगियोनो ने कहा कि मजबूती की शुरुआत ऐसे परिवारों से होती है जो अपना खर्च उठा सकें, किसानों के पास खाद्य उत्पादन के साधन हों, श्रमिकों को अच्छा रोजगार मिले और बच्चों को सीखने तथा अपना भविष्य बनाने का अवसर मिले। उन्होंने कहा कि देश ऐसी अर्थव्यवस्था तैयार कर रहा है, जो संकटों का सामना कर सके और नए अवसर पैदा करे।
मेक्सिको ने युवाओं के लिए बेहतर वेतन और निवेश को विकास तथा सुरक्षा रणनीति का अहम हिस्सा बताया। विदेश मंत्री रॉबर्टो वेलास्को अल्वारेज ने कहा कि मेक्सिको ने युवाओं के लिए शिक्षा और रोजगार कार्यक्रमों को मजबूत संस्थानों, खुफिया तंत्र और शोध के साथ जोड़ा है। उन्होंने कहा कि शांति केवल आदेश देकर या थोपकर कायम नहीं की जा सकती, बल्कि इसे सामाजिक न्याय के जरिए बनाया जाता है।
वेलास्को ने बताया कि 2018 के बाद से मेक्सिको में न्यूनतम वेतन में 154 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है और नागरिकों की क्रय शक्ति 40 से अधिक वर्षों के उच्चतम स्तर पर है। उन्होंने कहा कि श्रमिकों को बेहतर वेतन देने से अर्थव्यवस्था कमजोर नहीं होती, बल्कि वह और मजबूत होती है।
दक्षिण कोरिया ने तेजी से हो रहे तकनीकी बदलावों को लेकर युवाओं के रोजगार और आर्थिक भविष्य पर बढ़ती अनिश्चितता की ओर ध्यान दिलाया। राष्ट्रपति ली जे म्यांग ने कहा कि AI क्रांति असमानता को और गहरा कर सकती है तथा युवाओं में चिंता बढ़ा सकती है। उन्होंने बताया कि सियोल तकनीकी प्रगति को अंतरराष्ट्रीय समुदाय तक पहुंचाने के लिए ‘ग्लोबल AI हब’ मंच बनाने की योजना पर काम कर रहा है।
सिंगापुर ने AI को सबसे महत्वपूर्ण उभरता क्षेत्र बताते हुए देशों से विज्ञान, बुनियादी ढांचे और कौशल में निवेश बढ़ाने का आग्रह किया। विदेश मंत्री विवियन बालाकृष्णन ने कहा कि लोगों को नई तकनीकों को समझने और उनका सही इस्तेमाल करने के लिए सक्षम बनाना जरूरी है। उन्होंने जोर दिया कि AI के इस्तेमाल में इंसानों का नियंत्रण और जवाबदेही बनी रहनी चाहिए।
भारत ने भी AI को विकास के लिए अवसर के रूप में पेश किया, लेकिन इसके गलत इस्तेमाल को लेकर चेतावनी दी। चीन ने कहा कि AI का विकास सकारात्मक उद्देश्यों और मानव कल्याण के लिए होना चाहिए तथा इसका इस्तेमाल डिजिटल खाई को कम करने में किया जाना चाहिए।
जमैका ने चेतावनी दी कि तकनीकी प्रगति से मौजूदा आर्थिक असमानताएं और गहरी नहीं होनी चाहिए। विदेश मंत्री कमिना जॉनसन स्मिथ ने कहा कि AI को पुरानी असमानताओं को बढ़ाने और दुनिया में नई तरह की डिजिटल खाई पैदा करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। उन्होंने विकासशील देशों में डिजिटल बुनियादी ढांचे, कौशल और क्षमता निर्माण में अधिक निवेश की जरूरत बताई।
इन बयानों से यह बात सामने आई कि केवल शिक्षा तक पहुंच बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा। युवाओं के लिए ऐसी अर्थव्यवस्था भी जरूरी होगी, जो पर्याप्त उत्पादक रोजगार पैदा करे। साथ ही ऐसी तकनीकी नीतियों की जरूरत होगी, जिनसे विकासशील देश उन तकनीकी प्रणालियों पर पूरी तरह निर्भर न हों, जिन्हें कहीं और विकसित किया गया है।
भारत के लिए भी यह चर्चा महत्वपूर्ण है, क्योंकि देश में कामकाजी उम्र की आबादी बड़ी है। भारत की आर्थिक संभावनाएं इस बात पर भी निर्भर करेंगी कि शिक्षा और कौशल प्रशिक्षण तेजी से बदलती तकनीक के साथ कितना तालमेल बिठा पाते हैं और अर्थव्यवस्था रोजगार बाजार में आने वाले लोगों के लिए पर्याप्त उत्पादक अवसर पैदा कर पाती है या नहीं।















