अब यह बैठक 7 अक्टूबर की जगह 8 अक्टूबर (गुरुवार) को आयोजित की जाएगी. जीएसटी काउंसिल सचिवालय की ओर से
जारी ज्ञापन के मुताबिक, "अपरिहार्य कारणों" (unavoidable
circumstances) की वजह से बैठक का शेड्यूल बदला गया है. यह अहम बैठक
नई दिल्ली के भारत मंडपम में सुबह 11 बजे से शुरू होगी
इस बैठक में जीएसटी नियमों और अनुपालन
(compliance) को आसान बनाने के लिए कई बड़े फैसलों पर मुहर लग
सकती है.
बैठक में किन नियमों में बदलाव की उम्मीद
है?
काउंसिल की इस बैठक में टैक्स कानूनों
को नरम बनाने और कारोबारियों को राहत देने वाले कई प्रस्तावों पर विचार किया
जाएगा:
- गिरफ्तारी के प्रावधानों में ढील: जीएसटी
कानून के तहत गिरफ्तारी (arrest provisions) के कड़े
नियमों को हटाने का प्रस्ताव है. इसकी जगह केवल टैक्स रिकवरी, ब्याज और जुर्माने जैसे नागरिक परिणामों (civil consequences)
पर जोर दिया जाएगा. हालांकि, बहुत गंभीर
मामलों में मुकदमेबाजी (prosecution) जारी रहेगी.
- मुकदमेबाजी की सीमा बढ़ाना: प्रोसिक्यूशन
शुरू करने की सीमा को 1 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 5
करोड़ रुपये किया जा सकता है.
- नरम सजा और जुर्माना: कई
छोटे-मोटे अपराधों की श्रेणी को हल्का या खत्म किया जा सकता है. न्यूनतम सजा
का नियम हटाया जा सकता है और हर मामले में जुर्माने का विकल्प दिया जा सकता
है.
एक्सपोर्टर्स के लिए रिफंड प्रक्रिया
कैसे आसान होगी?
निर्यातकों (Exporters) को अक्सर जीएसटी रिफंड पाने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है. काउंसिल इस
प्रक्रिया को तेज और स्वचालित (automatic) बनाने पर विचार कर
रही है.
छोटे टैक्सपेयर्स और बिजनेस को क्या राहत
मिलेगी?
छोटे कारोबारियों को राहत देने के लिए
भी इस पैकेज में कई खास बिंदु शामिल हैं:
- लेट फीस में छूट: जो
व्यापारी किसी वजह से समय पर रिटर्न दाखिल नहीं कर पाए हैं, उनकी लेट फीस
माफ करने का प्रस्ताव है.
- जुर्माने का रद्दीकरण: सामान्य
जुर्माने और पेनल्टी को वाजिब (rationalise) बनाया जाएगा.
- तेज रजिस्ट्रेशन: नए
और योग्य आवेदकों के लिए जीएसटी रजिस्ट्रेशन देने की प्रक्रिया को ज्यादा
आसान और तेज किया जाएगा.
आगामी 8 अक्टूबर को होने वाली
इस बैठक से उम्मीद है कि जीएसटी प्रशासन और टैक्सपेयर्स दोनों के लिए काम करना
काफी आसान हो जाएगा.















