केंद्रीय संचार एवं उत्तर पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने सोमवार को मिजोरम की अपनी दो दिवसीय यात्रा के दौरान मिजोरम विश्वविद्यालय के छात्रों से बातचीत की और पूर्वोत्तर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, परंपराओं और विकास क्षमता पर प्रकाश डाला।
मंत्री ने पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय (डीओएनईआर) के अष्टलक्ष्मी दर्शन कार्यक्रम के तहत पूर्वोत्तर का दौरा कर रहे गोवा और चंडीगढ़ के छात्रों से भी बातचीत की और क्षेत्र के बारे में उनके अनुभवों और दृष्टिकोणों पर चर्चा की।
छात्रों को संबोधित करते हुए सिंधिया ने इस बात पर जोर दिया कि इस तरह के आदान-प्रदान से युवाओं को पूर्वोत्तर की सांस्कृतिक विविधता और विकास की संभावनाओं को समझने का अवसर मिलता है। उन्होंने कहा कि ये पहल आपसी समझ, सांस्कृतिक संबंधों और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने में सहायक होती हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पूर्वोत्तर के आठ राज्यों को राष्ट्र की अष्टलक्ष्मी के रूप में विकसित करने के दृष्टिकोण से प्रेरित होकर, यह कार्यक्रम देश के विभिन्न हिस्सों के छात्रों को इस क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं और विकास के अवसरों का प्रत्यक्ष अनुभव करने में सक्षम बनाता है।
पिछले एक वर्ष में 590 से अधिक छात्रों ने अष्टलक्ष्मी दर्शन कार्यक्रम में भाग लिया है, जिससे पूर्वोत्तर और देश के शेष हिस्सों के बीच मजबूत संबंध बनाने में मदद मिली है।
सिंधिया ने कार्यक्रम के विकसित भारत 2047 के विजन के साथ तालमेल पर भी प्रकाश डाला, जिसमें युवा भागीदारी, भारत की विविधता का उत्सव और देश की विकास यात्रा में पूर्वोत्तर की भूमिका पर जोर दिया गया।















