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14 खामियां, 220 रुपये फीस कम... सुप्रीम कोर्ट में क्यों अटकी राहुल गांधी की याचिका


देश 13 October 2026
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14 खामियां, 220 रुपये फीस कम... सुप्रीम कोर्ट में क्यों अटकी राहुल गांधी की याचिका

राहुल गांधी की याचिका सुप्रीम कोर्ट में क्यों अटकी हुई है, इसे समझने के लिए याचिका में सामने आई तकनीकी कमियों और कोर्ट की प्रक्रिया को समझना जरूरी है। किसी भी याचिका पर सुनवाई होने से पहले उसके दस्तावेजों, निर्धारित प्रारूप और जरूरी औपचारिकताओं की जांच की जाती है। यदि इनमें कोई कमी पाई जाती है, तो संबंधित पक्ष को उसे दूर करने के लिए कहा जा सकता है। ऐसे मामलों में राजनीतिक महत्व के साथ-साथ कानूनी प्रक्रिया भी अहम भूमिका निभाती है।

ताजा रिपोर्टों के मुताबिक, 12 अक्टूबर 2026 को राहुल गांधी और इंडिया गठबंधन के अन्य नेताओं ने चुनाव आयोग तथा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में संयुक्त याचिका दाखिल की थी। इस याचिका में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर (SIR) की प्रक्रिया और कथित चुनावी अनियमितताओं को लेकर हस्तक्षेप की मांग की गई है। लेकिन सुनवाई के लिए सूचीबद्ध होने से पहले ही सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने इसमें 14 तकनीकी कमियां दर्ज कर दीं। इनमें नौ याचिकाकर्ताओं के जरूरी वकालतनामे या अधिकार-पत्रों का नहीं होना, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के पहचान पत्र की अस्पष्ट फोटोकॉपी और अदालत की फीस में 220 रुपये की कमी शामिल है। इसके अलावा, कुछ दस्तावेजों के पन्ने गायब या अस्पष्ट बताए गए हैं, पृष्ठों की संख्या में गलतियां हैं और कुछ पुराने न्यायिक फैसलों की प्रतियां भी संलग्न नहीं की गई हैं। क्षेत्रीय भाषा के दस्तावेजों के अनुवाद और याचिका में मांगी गई राहत से संबंधित विवरणों पर भी आपत्तियां दर्ज की गई हैं।

इन कमियों के कारण याचिका को तत्काल सुनवाई के लिए सूचीबद्ध नहीं किया जा सका। हालांकि, यह समझना जरूरी है कि रजिस्ट्री की आपत्तियां अपने आप में याचिका के कानूनी आधार को खारिज करने या आरोपों को गलत साबित करने का फैसला नहीं हैं। रजिस्ट्री का काम दस्तावेजों और प्रक्रियागत नियमों की जांच करना है। याचिकाकर्ताओं की कानूनी टीम को निर्धारित औपचारिकताएं पूरी करके इन आपत्तियों को दूर करना होगा, जिसके बाद सुनवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है। विपक्षी नेताओं की मांग है कि मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच हो, मतदाताओं के नाम हटाने की प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए और चुनाव आयोग के निर्णयों से जुड़े रिकॉर्ड की जांच की जाए। दूसरी ओर, इन आरोपों पर न्यायिक निष्कर्ष आना अभी बाकी है। ऐसे में इस पूरे मामले में दो पहलू महत्वपूर्ण हैं—एक तरफ याचिका की तकनीकी खामियों को दूर करना और दूसरी तरफ मतदाता सूची तथा चुनावी प्रक्रिया से जुड़े आरोपों पर अदालत का रुख जानना। आने वाले समय में याचिका की सुनवाई और अदालत की टिप्पणियां इस मामले की दिशा तय करने में अहम होंगी

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