दिल्ली के रामलीला मैदान में 1 नवंबर को आयोजित 'वोट बचाओ, देश बचाओ' महारैली को लेकर कांग्रेस ने बड़े स्तर पर तैयारियां कीं। रैली में अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए पार्टी ने नेताओं और पदाधिकारियों को अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपीं। इसके तहत कई राज्यों में विधायकों, सांसदों, पूर्व विधायकों, जिला अध्यक्षों और विधानसभा चुनाव लड़ चुके नेताओं को समर्थक जुटाने का लक्ष्य दिया गया। पार्टी की रणनीति थी कि केवल बड़े नेताओं की मौजूदगी तक कार्यक्रम सीमित न रहे, बल्कि बूथ और विधानसभा स्तर के कार्यकर्ता भी बड़ी संख्या में दिल्ली पहुंचें। इसी उद्देश्य से संगठन ने नेताओं की सक्रियता और उनके क्षेत्र में जनसंपर्क की स्थिति का आकलन करने की योजना बनाई। कुछ जगहों पर नेताओं को 100 समर्थक लाने का लक्ष्य दिया गया, जबकि बड़े राज्यों और प्रमुख नेताओं के लिए इससे कहीं अधिक संख्या निर्धारित की गई। कांग्रेस नेतृत्व का प्रयास था कि रैली में देशभर से कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों की भागीदारी दिखाई दे।
कांग्रेस की इस रणनीति के पीछे पार्टी का राष्ट्रीय स्तर पर शक्ति प्रदर्शन करने का उद्देश्य भी जुड़ा था। पार्टी ने रामलीला मैदान की रैली के लिए करीब 10 लाख लोगों की भागीदारी का लक्ष्य बताया था। इसके लिए संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने विभिन्न राज्यों के वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठकें कीं। दिल्ली के आसपास के राज्यों हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, पंजाब और उत्तराखंड पर विशेष ध्यान दिया गया। नेताओं को न केवल समर्थक जुटाने बल्कि उनके आने-जाने, बसों और अन्य वाहनों की व्यवस्था करने की जिम्मेदारी भी दी गई। पार्टी की योजना थी कि रैली में शामिल होने वाले कार्यकर्ताओं की संख्या और उनके परिवहन का पूरा रिकॉर्ड रखा जाए। अलग-अलग राज्यों के नेताओं को अपने क्षेत्र से आने वाले लोगों की जानकारी संगठन तक पहुंचाने के निर्देश दिए गए
राजस्थान कांग्रेस को इस अभियान में एक लाख लोगों को दिल्ली पहुंचाने का लक्ष्य दिया गया था। शुरुआत में यह संख्या 50 हजार निर्धारित की गई थी, लेकिन बाद में इसे बढ़ाकर एक लाख कर दिया गया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली सहित वरिष्ठ नेताओं को इस अभियान में जिम्मेदारी दी गई। जयपुर, सीकर, झुंझुनूं, भरतपुर और करौली जैसे जिलों को भी बड़ी संख्या में कार्यकर्ता जुटाने का लक्ष्य मिला। कुछ जिलों के लिए 10-10 हजार लोगों को दिल्ली ले जाने की जिम्मेदारी तय की गई। वहीं उत्तर प्रदेश कांग्रेस को 50 हजार कार्यकर्ताओं की भागीदारी सुनिश्चित करने का लक्ष्य दिया गया था। पार्टी ने विधानसभा चुनाव के संभावित टिकट दावेदारों की संगठनात्मक सक्रियता को भी इस अभियान से जोड़कर देखा।















