भारत और यूरोपियन यूनियन ने होराइजन यूरोप के साथ नई दिल्ली के जुड़ाव पर बातचीत सफलतापूर्वक पूरी कर ली है। यह यूरोपियन यूनियन का 93.5 बिलियन यूरो का सबसे बड़ा रिसर्च और इनोवेशन फंडिंग प्रोग्राम है। इस अरेंजमेंट के तहत, भारतीय रिसर्चर, बिज़नेस और रिसर्च ऑर्गनाइज़ेशन होराइजन यूरोप से डायरेक्ट फंडिंग पाने और इसके दूसरे पिलर के तहत इंटरनेशनल कोलेबोरेटिव रिसर्च प्रोजेक्ट्स को लीड करने के लिए एलिजिबल होंगे। यह पिलर ग्लोबल चुनौतियों और यूरोपियन इंडस्ट्रियल कॉम्पिटिटिवनेस पर फोकस करता है। दोनों पक्षों द्वारा साइन और मंज़ूरी मिलने के बाद, यह एग्रीमेंट अगले साल जनवरी में लागू होने की उम्मीद है।
इस प्रोग्राम में हेल्थकेयर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल टेक्नोलॉजी, स्पेस, क्लाइमेट, एनर्जी और इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट जैसे खास एरिया शामिल हैं। यूरोपियन कमीशन ने कहा कि यह एग्रीमेंट भारत-EU रिश्तों में एक अहम मील का पत्थर है और इससे साइंटिफिक सहयोग मजबूत होगा, रिसर्च के नए मौके बनेंगे और उनकी स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप और गहरी होगी।
इस डेवलपमेंट का स्वागत करते हुए, EU की स्टार्टअप्स, रिसर्च और इनोवेशन कमिश्नर एकातेरिना ज़हारिएवा ने कहा कि इस एग्रीमेंट से दोनों तरफ के बिज़नेस, रिसर्चर्स और इनोवेटर्स के लिए भविष्य की टेक्नोलॉजी डेवलप करने में मिलकर काम करने के नए मौके मिलेंगे।
होराइजन यूरोप में अभी 23 जुड़े हुए नॉन-EU देश शामिल हैं, जिनमें यूनाइटेड किंगडम, कनाडा और जापान से लेकर साउथ कोरिया और स्विट्जरलैंड तक शामिल हैं। यह एसोसिएशन भारतीय संस्थानों को सीधे यूरोपियन कमीशन से ग्रांट लेने में मदद करेगा और भारतीय वैज्ञानिकों को कवर किए गए एरिया में बड़े इंटरनेशनल रिसर्च प्रोजेक्ट्स को लीड और कोऑर्डिनेट करने की इजाज़त देगा, ठीक वैसे ही जैसे EU सदस्य देशों के संगठनों को मिलते हैं।
इस एग्रीमेंट से भारत-EU साइंटिफिक और टेक्नोलॉजिकल सहयोग को नई तेज़ी मिलेगी और नई टेक्नोलॉजी और इनोवेशन में सहयोग मज़बूत होगा।















