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35 साल का रिकॉर्ड टूटा! शेयर बाजार में तूफानी तेजी, निवेशकों की चांदी


व्यापार 07 November 2026
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35 साल का रिकॉर्ड टूटा! शेयर बाजार में तूफानी तेजी, निवेशकों की चांदी

दिवाली से पहले भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त तेजी देखने को मिली है। सेंसेक्स और निफ्टी में आई इस तेजी ने निवेशकों के चेहरे पर मुस्कान ला दी है। महज सात कारोबारी सत्रों में सेंसेक्स 10.6 प्रतिशत तक चढ़ गया, जबकि निफ्टी में भी 10.27 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। बाजार की यह तेजी इसलिए भी खास है, क्योंकि पिछले 35 वर्षों में दिवाली से पहले सेंसेक्स में इतनी बड़ी तेजी देखने को नहीं मिली थी। लगातार बढ़ते बाजार ने निवेशकों के बीच एक बार फिर उत्साह पैदा कर दिया है।     30 नवंबर तक जमा करें जीवन प्रमाण, वरना रुकेगी पेंशन शेयर बाजार में आई इस तेजी के पीछे कई अहम कारण माने जा रहे हैं। इनमें विदेशी संस्थागत निवेशकों की वापसी, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट, वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेत, घरेलू निवेशकों की मजबूत खरीदारी और कंपनियों के बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद शामिल है। इन कारकों ने मिलकर भारतीय बाजार को मजबूती दी है। आइए जानते हैं बाजार में तेजी की पांच बड़ी वजहें। 1. विदेशी निवेशकों की बाजार में वापसी भारतीय शेयर बाजार में तेजी आने की सबसे बड़ी वजह विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की वापसी मानी जा रही है। पिछले कुछ समय से विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से लगातार पैसा निकाल रहे थे। इससे बाजार पर दबाव बना हुआ था और प्रमुख सूचकांकों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा था। हालांकि, अब विदेशी निवेशकों का रुख बदलता नजर आ रहा है।   - क्वालिटी वॉल्स इंडिया की बिक्री में 31.8% उछाल, शानदार तिमाही नतीजे विदेशी निवेशकों की खरीदारी बढ़ने से बाजार में नकदी का प्रवाह मजबूत हुआ है। जब विदेशी निवेशक बड़ी मात्रा में भारतीय कंपनियों के शेयर खरीदते हैं, तो इससे बाजार में मांग बढ़ती है और शेयरों की कीमतों को समर्थन मिलता है। खासकर बैंकिंग, आईटी, वित्तीय सेवाओं और बड़े बाजार पूंजीकरण वाली कंपनियों में निवेश बढ़ने से सेंसेक्स और निफ्टी को मजबूती मिली है। निवेशकों को उम्मीद है कि विदेशी पूंजी का यह प्रवाह आगे भी बाजार को सहारा दे सकता है।   - महिंद्रा की CNG SUV ने सुरक्षा में मारी बाजी, मिली 5-स्टार रेटिंग 2. कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से मिली राहत भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए राहत लेकर आती है। तेल सस्ता होने से देश का आयात बिल कम हो सकता है और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव घटने की संभावना रहती है। इसके अलावा पेट्रोलियम उत्पादों की लागत कम होने से परिवहन, उत्पादन और कई उद्योगों के खर्च में भी कमी आ सकती है। इससे कंपनियों के मुनाफे में सुधार की उम्मीद बढ़ती है। महंगाई पर नियंत्रण रखने में भी सस्ता कच्चा तेल मददगार साबित हो सकता है। यही वजह है कि तेल की कीमतों में गिरावट को शेयर बाजार के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। निवेशकों को उम्मीद है कि इससे भारतीय कंपनियों की कमाई और आर्थिक गतिविधियों को फायदा मिल सकता है।   - दिवाली पर कारोबार में उछाल, दिल्ली का व्यापार 80,000 करोड़ रुपए तक पहुंचने की उम्मीद: सीटीआई 3. वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेत भारतीय शेयर बाजार पर दुनिया के प्रमुख शेयर बाजारों की चाल का भी असर पड़ता है। अमेरिका, यूरोप और एशियाई बाजारों में सकारात्मक माहौल रहने पर भारतीय बाजार को भी समर्थन मिलता है। वैश्विक अर्थव्यवस्था को लेकर निवेशकों की चिंताएं कम होने और प्रमुख बाजारों में खरीदारी बढ़ने से भारतीय निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ है। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ब्याज दरों को लेकर बन रही संभावनाएं भी निवेशकों के फैसलों को प्रभावित करती हैं। यदि वैश्विक स्तर पर ब्याज दरों में नरमी की उम्मीद बढ़ती है, तो निवेशक जोखिम वाले निवेश विकल्पों की ओर आकर्षित हो सकते हैं। इसका फायदा उभरते बाजारों, विशेषकर भारत जैसे तेजी से बढ़ते बाजारों को मिल सकता है। वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों ने घरेलू शेयर बाजार में तेजी की धारणा को मजबूत किया है। 4. घरेलू निवेशकों की मजबूत खरीदारी भारतीय शेयर बाजार को घरेलू निवेशकों का लगातार मिल रहा समर्थन भी तेजी की बड़ी वजह है। म्यूचुअल फंड, बीमा कंपनियों और खुदरा निवेशकों की ओर से शेयर बाजार में निवेश बढ़ने से बाजार को मजबूती मिल रही है। सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के माध्यम से म्यूचुअल फंड में नियमित निवेश करने वाले लोगों की भागीदारी ने भी बाजार को सहारा दिया है। विदेशी निवेशकों की बिकवाली के दौरान भी घरेलू संस्थागत निवेशकों ने कई मौकों पर खरीदारी जारी रखी, जिससे बाजार में बड़ी गिरावट को रोकने में मदद मिली। दिवाली जैसे त्योहारों से पहले निवेशकों की बाजार में दिलचस्पी बढ़ना भी स्वाभाविक है। हालांकि, केवल त्योहारी माहौल के कारण तेजी को स्थायी नहीं माना जा सकता। बाजार की मजबूती के लिए निवेश और कंपनियों के वास्तविक प्रदर्शन का बेहतर होना जरूरी है। 5. कंपनियों के नतीजों और अर्थव्यवस्था को लेकर बढ़ा भरोसा शेयर बाजार में तेजी के पीछे कंपनियों की कमाई को लेकर बेहतर होती उम्मीदें भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। निवेशक किसी कंपनी के शेयर में पैसा लगाने से पहले उसके कारोबार, बिक्री, मुनाफे और भविष्य की संभावनाओं का आकलन करते हैं। यदि कंपनियों के तिमाही नतीजे बेहतर रहते हैं, तो उनके शेयरों में खरीदारी बढ़ सकती है। बैंकिंग, ऑटोमोबाइल, आईटी, एफएमसीजी और वित्तीय क्षेत्र की कंपनियों के प्रदर्शन पर बाजार की नजर रहती है। इसके साथ ही देश में घरेलू मांग, बुनियादी ढांचे पर खर्च और आर्थिक गतिविधियों में मजबूती की उम्मीद भी निवेशकों का भरोसा बढ़ाती है। भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास संभावनाओं को देखते हुए घरेलू और विदेशी निवेशक लंबी अवधि के लिए बाजार में अवसर तलाश रहे हैं। यही सकारात्मक धारणा बाजार की तेजी को समर्थन दे रही है। निवेशकों के लिए क्या है संकेत? दिवाली से पहले सेंसेक्स और निफ्टी में आई यह तेजी बाजार के लिए उत्साहजनक संकेत है। सात कारोबारी सत्रों में सेंसेक्स का 10.6 प्रतिशत चढ़ना पिछले 35 वर्षों में दिवाली से पहले की सबसे बड़ी तेजी बताई जा रही है। हालांकि, इतनी तेज बढ़त के बाद बाजार में मुनाफावसूली और उतार-चढ़ाव की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। निवेशकों को केवल तेजी देखकर जल्दबाजी में शेयर खरीदने से बचना चाहिए। किसी भी निवेश से पहले कंपनी की वित्तीय स्थिति, शेयर का मूल्यांकन और अपनी जोखिम उठाने की क्षमता को समझना जरूरी है। लंबी अवधि के निवेशकों के लिए बाजार में अनुशासन बनाए रखना अधिक महत्वपूर्ण है। कुल मिलाकर, विदेशी निवेशकों की वापसी, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट, वैश्विक बाजारों का सकारात्मक रुख, घरेलू निवेश और कंपनियों की कमाई को लेकर बढ़ती उम्मीदों ने भारतीय शेयर बाजार को नई ऊंचाई की ओर बढ़ने का मौका दिया है। अब निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि दिवाली के बाद भी बाजार अपनी इस तेजी को बरकरार रख पाता है या नहीं।


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