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धमतरी मॉडल बना मिसाल : ‘बाला’ अवधारणा अब पूरे प्रदेश में लागू


छत्तीसगढ़ 18 February 2026
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धमतरी मॉडल बना मिसाल : ‘बाला’ अवधारणा अब पूरे प्रदेश में लागू

धमतरी, 18 फ़रवरी । बाल शिक्षा और सर्वांगीण विकास के क्षेत्र में धमतरी जिले की पहल अब पूरे छत्तीसगढ़ के लिए उदाहरण बन गई है। जिले में सफलतापूर्वक लागू की गई ‘बाला’ बिल्डिंग एज लर्निंग एड (भवन को शिक्षण सहायक सामग्री के रूप में विकसित करने की अवधारणा) को अब प्रदेशभर में लागू किया जाएगा।

इस संबंध में पंचायत एवं ग्रामीण विकासविभाग ने निर्देश जारी करते हुए महात्मा गांधी ग्रामीण रोजगार गारंटी एक्ट के अंतर्गत ग्राम पंचायतों में निर्मित एवं निर्माणाधीन सभी आंगनबाड़ी भवनों में बाला अवधारणा को अनिवार्य रूप से लागू करने को कहा है।

निर्देशानुसार महिला एवं बाल विकास विभाग के समन्वय से आंगनबाड़ी भवनों को इस प्रकार विकसित किया जाएगा कि भवन स्वयं बच्चों के लिए शिक्षण सामग्री का कार्य करे। दीवारों पर वर्णमाला, अंक, आकृतियां और स्थानीय चित्रकथाएं उकेरी जाएंगी। फर्श पर खेल आधारित शिक्षण सामग्री तैयार की जाएगी तथा खिड़की-दरवाजों के माध्यम से आकार और माप की समझ विकसित करने जैसे नवाचार शामिल किए जाएंगे। इससे बच्चों में जिज्ञासा, रचनात्मकता और बौद्धिक क्षमता का स्वाभाविक विकास होगा।विभाग ने सभी ग्राम पंचायतों को स्वीकृत तकनीकी रूपरेखा और निर्धारित वित्तीय प्रावधानों के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण निर्माण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही प्रदेश में जारी सभी आंगनबाड़ी भवन निर्माण कार्यों को प्राथमिकता के साथ 15 मार्च 2026 तक पूर्ण करने पर जोर दिया गया है। अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के समन्वय से इस पहल को प्रभावी रूप से लागू करने की अपेक्षा की गई है।

कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने कहा कि धमतरी में बाला अवधारणा के सकारात्मक परिणाम स्पष्ट रूप से सामने आए हैं। आंगनबाड़ी केंद्र अब केवल भवन नहीं, बल्कि बच्चों के लिए जीवंत शिक्षण प्रयोगशाला बन चुके हैं। बच्चों की उपस्थिति में वृद्धि, सीखने की गति में सुधार और अभिभावकों की संतुष्टि इस पहल की सफलता को दर्शाती है। उन्होंने निर्माण कार्यों में गुणवत्ता, सुरक्षा मानकों और समय-सीमा का विशेष ध्यान रखने के निर्देश दिए। साथ ही स्थानीय कलाकारों और समुदाय की सहभागिता से आंगनबाड़ी केंद्रों को आकर्षक, सुरक्षित और बाल-अनुकूल बनाने पर बल दिया। धमतरी का यह नवाचार अब पूरे प्रदेश में प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा को नई दिशा देगा और ग्रामीण अधोसंरचना के सृजनात्मक उपयोग का प्रभावी उदाहरण बनेगा। यह पहल बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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