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TCS Nashik case: मुख्य आरोपी को 6 दिन की कस्टडी, पुलिस ने स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर की मांगी


व्यापार 25 April 2026
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TCS Nashik case: मुख्य आरोपी को 6 दिन की कस्टडी, पुलिस ने स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर की मांगी

नासिक में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज़ (TCS) कंपनी में धार्मिक उत्पीड़न और धर्म बदलने की कोशिश के आरोपों से जुड़े हाई-प्रोफ़ाइल मामले ने अब काफ़ी तूल पकड़ लिया है। नासिक पुलिस कमिश्नरेट की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने मुख्य संदिग्ध तौसीफ़ अत्तर समेत चार लोगों को गिरफ़्तार किया है। नासिक डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने इन संदिग्धों को 29 अप्रैल तक छह दिनों की पुलिस कस्टडी में भेज दिया है। इस मामले की गंभीरता और इंटरनेशनल असर को देखते हुए, पुलिस कमिश्नरेट ने औपचारिक तौर पर सरकार से एडवोकेट अजय मिसर को स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर नियुक्त करने का अनुरोध किया है।

इस मामले की सुनवाई एडिशनल चीफ़ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट एसवी लाड की कोर्ट में हुई। कथित अपराध की गंभीरता को देखते हुए, कार्यवाही 'इन-कैमरा' (बंद दरवाज़ों के पीछे) हुई। जांच एजेंसी ने 10 दिन की रिमांड मांगी थी, लेकिन कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद तौसीफ बिलाल अत्तर (37), दानिश एजाज शेख (32), शाहरुख हुसैन शौकत कुरैशी (34), और रजा रफीक मेमन (35) के लिए छह दिन की पुलिस कस्टडी दे दी। अब तक, इस मामले में मुंबई नाका और देवलाली कैंप पुलिस स्टेशनों में कुल नौ केस (जिसमें आठ महिला और एक पुरुष शिकायतकर्ता शामिल हैं) दर्ज किए गए हैं। संदिग्ध आसिफ अंसारी, शफी शेख, और AGM अश्विनी चैनानी अभी ज्यूडिशियल कस्टडी (जेल) में हैं।

अजय मिसर के अपॉइंटमेंट का प्रपोज़ल यह देखते हुए कि यह केस एक इंटरनेशनल लेवल पर जानी-मानी कंपनी से जुड़ा है और क्राइम का नेचर कॉम्प्लेक्स है, नासिक पुलिस ने सरकार को एक प्रपोज़ल दिया है जिसमें अजय मिसर को स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर के तौर पर अपॉइंटमेंट देने की मांग की गई है। इस कदम से प्रॉसिक्यूशन के केस को काफी लीगल मजबूती मिलने की उम्मीद है। सभी संदिग्धों की ज़मानत अर्ज़ी पर अगली सुनवाई 28 अप्रैल को होनी है, और पूरे शहर का ध्यान अभी इस मामले पर है।

चौंकाने वाले आरोप और हैरेसमेंट का तरीका कंपनी में काम करने वाली 35 साल की एक सीनियर महिला एनालिस्ट की शिकायत के मुताबिक, इस मामले में बहुत गंभीर आरोप हैं। शिकायत में बताई गई खास बातें इस तरह हैं: - धार्मिक दबाव: पीड़ित के धर्म के बारे में गाली-गलौज और अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करना और उसे एक खास धर्म से जुड़ी टोपी पहनने और धार्मिक प्रार्थना करने के लिए मजबूर करना। - धर्म बदलने की कोशिश: पीड़ित को ज़बरदस्ती नॉन-वेज खाना खिलाकर धर्म बदलने की कोशिश करना। - काम की जगह पर हैरेसमेंट: विरोध करने पर बदले में गंदी बातें करना और सीनियर मैनेजमेंट को झूठी रिपोर्ट भेजकर पीड़ित का करियर बर्बाद करने की धमकी देना। - जादू-टोना: पीड़ित को खजूर खिलाकर बेहोशी की हालत में लाना और उनकी पारिवारिक मुश्किलों का फ़ायदा उठाकर उन्हें 'काला जादू' या रूहानी परेशानी के बहाने फंसाना।






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