नई दिल्ली: दिलजीत दोसांझ की पॉलिटिकल ड्रामा फिल्म 'सतलुज' को Zee5 से हटाए जाने के कुछ दिनों बाद, दिल्ली सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी (DSGMC) ने फिल्म पर लगी रोक पर आपत्ति जताई है. उन्होंने इसे सोशल एक्टिविस्ट जसवंत सिंह खालरा की कहानी को दबाने की कोशिश बताया है. DSGMC ने यह भी घोषणा की है कि वे फिल्म को लोगों तक पहुंचाने के लिए पब्लिक स्क्रीनिंग और एजुकेशनल सेमिनार करेंगे. हनी त्रेहान के डायरेक्शन में बनी यह फिल्म 1990 के दशक में पंजाब के प्रमुख मानवाधिकार कार्यकर्ताओं में से एक, खालरा के जीवन और मृत्यु पर आधारित है.
'सतलुज' पर दिल्ली सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी का बयान
मंगलवार (7 जुलाई) को DSGMC के अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका ने कहा कि जसवंत सिंह खालरा के जीवन पर आधारित यह फिल्म पंजाब में कथित मानवाधिकार उल्लंघनों को उजागर करने के एक्टिविस्ट के प्रयासों को दिखाती है और इसे दर्शकों तक पहुंचने से नहीं रोका जाना चाहिए.
कालका ने कहा, "क्योंकि यह फिल्म जसवंत सिंह खालरा की जिंदगी पर आधारित है, इसलिए इसमें दिखाया गया है कि कैसे एक सोशल एक्टिविस्ट ने लोगों के सामने सच्चाई खोली. उन्होंने 25,000 शवों के सबूत उजागर किए जिनका अंतिम संस्कार 'लावारिस' के तौर पर किया गया था और पंजाब की गंभीर स्थिति को उजागर करते हुए इस मुद्दे को न केवल देश के भीतर बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उठाया. इस कहानी को दबाना और उस काले दौर की घटनाओं को जनता तक पहुंचने से रोकना है जो कि बहुत गलत है, और इससे सिख समुदाय में भारी आक्रोश पैदा हुआ है." उन्होंने कहा कि कमेटी ने फिल्म की पब्लिक स्क्रीनिंग करने और खालरा के जीवन और काम पर एजुकेशनल संस्थानों में सेमिनार करने का फैसला किया है.
उन्होंने आगे कहा, "हमने सभी गुरुद्वारा कमेटी सदस्यों से कहा है कि वे अपने-अपने इलाकों में फिल्म डाउनलोड करें और उसकी स्क्रीनिंग करें ताकि यह ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचे. इसके अलावा, हम जल्द ही अपने स्कूलों और कॉलेजों के चेयरमैन के साथ बैठक करेंगे. हर कॉलेज में जसवंत सिंह खालरा के जीवन और विरासत पर चर्चा करने के लिए सेमिनार आयोजित किए जाएंगे. हम चाहते हैं कि लोग समझें कि समाज पर एक सोशल एक्टिविस्ट का क्या असर हो सकता है."















